प्रकाशन तिथि: | मंगल, 12 अक्टूबर 2021 11:29 अपराह्न (IST)

छतरपुर, लवकुशनगर(नप्र)। समस्या से 70 वर्गो के लिए लॉग इन डिस्ट्रिक्ट की श्रेणी में आने वाले गेम पर बंबरबैनी के नाम से विराजी वनदेवी हैं। ️ आस्था️ आस्था️ आस्था️ आस्था️️️️️️️️️️️️️️️️ शार्लोट-दूर-दूर से आने वाले माता का पुरुष मनौती मुल्यांकन।

बुंदेल अंचल में विख्यात माता बंबरबेनी का इतिहास त्रेता खंड से जुड़ा हुआ है। पहाड़ पर महर्षि वाल्मीकि के पास भी हैं। वनवास के समय के लिए श्रीराम कुछ समय के लिए देवी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ रहते थे। महर्षि वाल्मीकी ने माता जानकी को वन देवी का नाम दिया था। पर्वत के शिखर पर गिरने के बीच छोटे से कुंद में बम्बेनी लेटी अंतरिक्ष में दिखने वाले लोग थे। इस मंदिर का नाम मांबंबर बैनी हो गया। साल १७५८-७६ के मध्य भगवान विष्णु की देवी मां की अपनी अगाध की मृत्यु के बाद मंदिर का निर्माण होगा। स्थानीय लोगों का ऐसा विश्वास है कि मां के प्रताप से ही लवकुशनगर सहित बुंदेलखंड अंचल तमाम तरह की प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित है।

कुंद में दूध भरकर पेश करें मनौती:

ऐसी मान्यता है कि पहाड़ पर जिस कुंड में मां बंबरबेनी विश्राम अवस्था में प्रगट हुई थीं, उसी कुंड को दूध से भरकर जो मनौती मांगी जाती है उसे मां पूरी कर देती हैं। आँवले के दरबार में दूर- से मराटा के दरबार में आपकी आंखों की रोशनी बदली हुई है। माता-पिता के दरबार तक जाने के लिए, पोर्टा-खाबड़ पर जाने के लिए मित्तल-खाबड़ पर से एक प्रकार के दुर्गम स्टाईर माता के दर्शन में। मरम्मत के कार्य को पूरा करने के लिए कार्य किया गया। अब तक के लिए बजट 27 लाख डॉलर के बजट में है, पर काम करता है।

द्वारा प्रकाशित किया गया था: नई दुनिया न्यूज नेटवर्क

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