पटना
देशभर की कई बिजली उत्पादन इकाइयों में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर देखने को मिल रहा। इसकी वजह से मुजफ्फरपुर समेत पूरे उत्तर बिहार में भी गंभीर बिजली संकट के हालात पैदा हो सकते हैं। हालांकि, प्रदेश सरकार ने कहा है कि लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस संबंध में ऊर्जा सचिव संजीव हंस ने बताया कि दुर्गा पूजा में अधिक दर पर बिजली खरीदने के लिए का फैसला लिया गया है। महंगी बिजली खरीदकर उपभोक्ताओं को सस्ते दरों पर ही बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाएगी।

कोयले की कमी से बिजली उत्पादन पर पड़ा असर
बिहार के ऊर्जा सचिव संजीव हंस ने बताया कि प्रदेश में विद्युत कंपनियों की ओर से अपना उत्पादन नहीं किया जाता है। बल्कि, केंद्रीय बिजली उत्पादन संस्थानों की ओर से तैयार बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को दी जाती है। कोयला की कमी के कारण देशभर में विद्युत उत्पादन में कमी आई है। बिहार को एनटीपीसी से 4500 मेगावाट बिजली मिलती है। हालांकि, अभी 3000 मेगावाट बिजली ही मिल रही है। इसी तरह से निजी कंपनियों से भी 688 मेगावाट की जगह महज 347 मेगावाट बिजली मिल रही है।

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ऊर्जा सचिव बोले- लोगों को नहीं होगी परेशानी
विभाग की ओर से बताया गया कि पवन ऊर्जा से 580 मेगावाट की जगह केवल 100 मेगावाट बिजली ही मिल रही है। मौसम में बदलाव के चलते अभी इसमें सुधार की संभावना नहीं दिख रही है। बाजार में भी बिक्री के लिए बिजली की उपलब्धता कम रह गई है। ऐसे में इसकी दर 20 रुपये प्रति यूनिट तक चला गया है। बोली लगाने पर भी पूरी मात्रा में बिजली नहीं मिल पा रही है। हालांकि, ऊर्जा सचिव ने कहा है कि लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। पूजा के दौरान बाजार से बिजली खरीदकर हरसंभव इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

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बिजली संकट टालने को लेकर केंद्र लगातार उठा रहा जरूरी कदम
विभाग की ओर से बताया कि केंद्र सरकार की ओर से विद्युत मंत्रालय के स्तर पर कोयला मंत्रालय से संपर्क करके कोयले की उपलब्धता को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। मॉनसून की समाप्ति के बाद अब कोयला खदानों से खनन में बढ़ोतरी हो रही है, साथ ही विदेशों से भी कोयला मंगाने की सूचना मिली है। ऐसे में अगले दो से तीन दिन में स्थिति कुछ सुधर सकती है।

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जानिए मुजफ्फरपुर में बिजली आपूर्ति क्या है स्थिति
इस बीच विभाग की ओर से बताया कि मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को 260 से 265 यूनिट मेगावाट बिजली की जरूरत थी। इसकी जगह 187 मेगावाट बिजली मिली है। हालांकि, जिले में 22 घंटे बिजली आपूर्ति हो रही है। इधर एनटीपीसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, कांटी थर्मल प्लांट में कोयले की किल्लत के बावजूद दोनों चल रही है।



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