हाइलाइट्स:

  • बिहार की डेप्युटी सीएम रेणु देवी के भाई पर संगीन इल्जाम
  • रेणु देवी ने भाई रवि प्रसाद से ताल्लुकात होने से किया इंकार
  • भाई की वजह से विवादों में आए थे मंत्री राम सूरत राय
  • पिता की संपत्ति की वजह से केस में फंसे हैं तेजस्वी यादव

पटना
जब परिवार का कोई सदस्य पावरफुल होता है तो उसके नाम का दूसरे रिश्तेदार फायदा उठाते हैं। इसमें कुछ भी नया नहीं है। यह दुनिया की रीति है। हर समाज में ऐसा होता आया है, आगे भी होता रहेगा। मगर फायदा जब गुनाह तक पहुंच जाए तो उसमें कोई भी भागीदार होना नहीं चाहता है। बिहार की डेप्युटी सीएम रेणु देवी और मंत्री रामसूरत राय इसके बानगी है। मगर तेजस्वी यादव खुशनसीब नहीं निकले, आईआरसीटीसी मामले में समेटा गए।

भाई की वजह से विवादों में डेप्युटी सीएम रेणु देवी
बिहार की डेप्युटी सीएम रेणु देवी के भाई पर पटना के पटेलनगर इलाके में आठ-साढ़े आठ कट्ठे के एक प्लॉट पर कब्जा करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि जमीन की कीमत करोड़ों में है। जिसे कब्जा करने डेप्युटी सीएम रेणु देवी के भाई रवि प्रसाद गए थे। मीडिया में दावा किया गया कि इसका सीसीटीवी फुटेज भी सबूत के तौर पर मौजूद है। जमीन के मालिक ने बताया कि पुलिस-प्रशासन से उन्हें मदद नहीं मिल पा रही है। शिकायत करने के काफी देर बाद भी पुलिस नहीं पहुंची। जब वो खुद विरोध करने गए तो उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि रेणु देवी का कहना है कि कई साल पहले उन्होंने अपने भाई से संबंध तोड़ लिया था। अपने भाई से उनकी बातचीत भी नहीं होती है। रेणु देवी के भाई रवि प्रसाद का दो साल पहले बेतिया में दबंगई और गुंडागर्दी का वीडियो सामने आया था। जिसमें वो बीच बाजार में एक दवा दुकानदार की पिटाई करते देखे गए थे। तब भी रेणु देवी ने भाई से किसी तरह के संबंध होने से इनकार किया था।

मंत्री रामसूरत राय के लिए भाई बने थे गले की फांस
भूमि सुधार और राजस्व मंत्री रामसूरत राय के लिए उनके भाई हंसलाल राय मुसीबतों का पहाड़ लेकर आए थे। किसी तरह रामसूरत राय ने उससे पार पाया। मगर तबतक गंगा में बहुत पानी बह चुका था। उन्होंने सबूत-सबूत दिखाया कि भाई से उनका कोई रिश्ता नहीं है। मगर नेता प्रतिपक्ष ने ऐसी घेराबंदी की कि रामसूरत राय के पसीने छूट गए। सदन में कई दिनों तक हंगामा होता रहा। बाद में विधानसभा में भी रामसूरत ने बयान दिया। तब जाकर मामला शांत हुआ। दरअसल 8 नवंबर 2020 की रात 12 बजे बोचहां थाना पुलिस ने स्थानीय अर्जुन मेमोरियल स्कूल परिसर में छापेमारी कर एक ट्रक और चार पिकअप वैन पर लोड 816 कार्टन शराब जब्त की थी। मंत्री रामसूरत राय के भाई हंसलाल राय को स्कूल परिसर का मालिक बताते हुए एफआईआर कराई गई थी। छापेमारी के बाद हंसलाल राय ने अग्रिम जमानत लेने के लिए विशेष कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अर्जी को खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रूख किया था। तबतक ये मुद्दा विपक्ष के हाथ लग चुका था।
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पिता की कमाई संपत्ति की वजह से लेपेटे में तेजस्वी
फिलहाल बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को डेप्युटी सीएम रेणु देवी और मंत्री रामसूरत राय की तरह राहत नहीं मिली है। आईआरसीटीसी घोटाले में उनका नाम घसीटा जा रहा है। एक हकीकत ये भी है कि तेजस्वी ने रेणु देवी और रामसूरत राय की तरह ये नहीं कहा कि उनका अपने पिता लालू यादव से कोई संबंध नहीं है। हालांकि वो इतना जरूर कहते रहे हैं कि तब तो मेरा मूंछ भी नहीं आया था, मैं घोटाला कैसे कर सकता हूं। इसका मतलब ये है कि अपने पिता के किए गलत कामों में भागीदार नहीं हूं। मगर सिर्फ कह देने भर से काम नहीं चलता बल्कि कोर्ट में सबूतों की जरुरत पड़ती है। दरअसल लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए रेलवे ने रांची और पुरी के दो बीएनआर होटलों को एक निजी कंपनी को लीज पर चलाने के लिए दिया था। कंपनी के लिए शर्तों को भी तोड़ा-मरोड़ा गया था। इसके एवज में पटना के सगुना मोड़ के पास तीन एकड़ जमीन दूसरे हाथों से होते हुए लालू परिवार तक पहुंची। जिस लारा कंपनी के हाथों में ये जमीन आई उसमें राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का भी नाम है। इसी वजह से तेजस्वी कहते हैं कि जब ये सबकुछ शुरू हुआ था तो उनका मूंछ भी नहीं उगा था।



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