bihar news: bihar muzaffarpur sadar hospital girl dies due to litchi seed stuck in her neck : मुजफ्फरपुर के संजय की राधा को किसने मारा…लीची का बीज या हेल्थ सिस्टम

हाइलाइट्स:

  • मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में बच्ची की मौत मामला
  • सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने दिए जांच के आदेश
  • इमरजेंसी में आई बच्ची का मांगा गया था कोरोना रिपोर्ट
  • कोरोना जांच रिपोर्ट आने तक नहीं किया गया इलाज

संदीप कुमार, मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से एक बच्ची की मौत का आरोप लगा है। इमरजेंसी में आई बच्ची का डॉक्टर ने कोरोना रिपोर्ट मांग दिया था। जब तक उसके पिता कोरोना टेस्ट कराकर रिपोर्ट लाए, तब तक मासूम दुनिया को छोड़ चुकी थी। बच्ची के गले में लीची का बीज अटक गया था।

राधा की मौत हुई या सिस्टम ने मारा?
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में लापरवाही की वजह से राधा कुमारी अब इस दुनिया में नहीं है। ऐसा संजय राम ने सदर अस्पताल के डॉक्टरों पर आरोप लगाया है। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने संजय राम से उनकी बिटिया का कोरोना रिपोर्ट की डिमांड कर दी। हिदायत दी कि जबतक कोरोना रिपोर्ट नहीं मिल जाता, वो हाथ भी नहीं लगाएंगे। बिटिया को कंधे पर लिए दो घंटे तक संजय राम इस काउंटर से उस काउंटर घूमते रहे। जब तक कोरोना रिपोर्ट लेकर दोबारा इमरजेंसी में पहुंचे तब तक संजय राम की बिटिया दुनिया छोड़ चुकी थी। जिस बिटिया को गोद में खेलाते थे। अब वो उनके कंधे पर लाश बनकर पड़ी थी। संजय का कहना था कि अगर इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर समय पर देख लिए होते तो उसकी जान बच जाती। आज वो फिर अपने राधा के साथ होते। मगर अनहोनी हो गया।
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‘…उधर जाते-जाते जान ले लिया’
अस्पताल कैंपस में उन्होंने बिटिया के लाश को कंधे पर लिए रोते हुए बस इतना कहा कि ‘लीची का बिया अटक गया था…जाते हैं तो एक घंटा से दौड़ा रहा है इधर से उधर…कोई कहता है उस काउंटर पर…कोई कहता उधर जाओ…उधर जाते-जाते जान ले लिया…’ उनकी बातचीत से लगा कि उनकी आठ साल की बेटी लीची खा रही थी और उसका बीज उसके गले में फंस गया था। बोल नहीं पा रही थी। इसी का इलाज के लिए वो सदर अस्पताल आए थे। मगर जब सदर अस्पताल कैंपस से रूखसत हुए तो उनकी राधा की आवाज हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी। अब तो आलम ये है कि संजय को लीची से डर लगता है। वो अपन हाथों से फिर कभी किसी बच्चे को लीची खाने के लिए नहीं देंगे।
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सिविल सर्जन करा रहे मामले की जांच

कुढ़नी प्रखंड के रघुनाथपुर मधुबन गांव के रहनेवाले संजय राम सबसे पहले बच्ची को लेकर कुढ़नी अस्पताल पहुंचे थे। वहां तैनात डॉक्टरों ने सदर अस्पताल रेफर कर दिया। यहां आकर कोरोना टेस्ट के चक्कर में पूरा मामला उलझ गया। इंतजार और मिन्नत के बाद इलाज के लिए डॉक्टर तैयार नहीं हुए। आखिरकार कोरोना रिपोर्ट आई लेकिन दुनिया बदल चुकी थी। मीडिया के जरिए मामला सिविल सर्जन डॉ. एस के चौधरी तक पहुंचा था। उन्होंने चिकित्सकों की लापरवाही को गंभीर करार देते हुए जांच और कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि इमरजेंसी, इमरजेंसी होता है। उस वक्त किसी की जान बचाना ज्यादा जरूरी होता है। बाकी के प्रोटोकॉल पूरा करने के लिए दूसरे लोग होते हैं।

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