हाइलाइट्स

  • पश्चिम चंपारण में जहरीली शराबकांड की खुल रही परतें
  • अब तक 4 पीड़ित गंवा चुके आंख की रोशनी
  • माफिया इलाके में धड़ल्ले से बेच रहा था जहरीली शराब
  • ‘बगैर पुलिस की जानकारी के शराब की बिक्री नामुमकिन’

देवरवा/तेलपुर/मंगुराहा (पश्चिम चंपारण):
पश्चिम चंपारण के देवराज क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों में पिछले एक सप्ताह में हुई 16 संदिग्ध मौतों के अलावा जहरीली शराब की त्रासदी ने बचे लोगों को भी नहीं बख्शा है। कम से कम चार पीड़ित जो अवैध रूप से शराब का सेवन करने के बाद मौत से बच गए, उनकी आंखों की रोशनी चली गई है। ये पीड़ित तेलपुर के इजहार आलम, देवरवा के मुमताज मियां और मंगुराहा के सुखल मियां और नूर आलम खान हैं।

जहरीली शराब ने छीनी आंख की रोशनी
हादसे के एक पीड़ित 40 वर्षीय मटन विक्रेता और छह बच्चों के पिता इजहार आलम ने अपने तेलपुर घर पर बताया कि ‘मैं आम तौर पर नहीं पीता लेकिन उस दिन मैं रामबृक्ष के घर गया और थोड़ी सी शराब पी ली। घर आने के बाद, मेरे पेट में ऐंठन हुई और मुझे दवाएं दी गईं। लेकिन, इससे कोई फायदा नहीं हुआ। मैं बेहोश हो गया और जब मुझे होश आया तो मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।
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इजहार की पत्नी सोनी के मुताबिक ‘ मैं उसे इलाज के लिए एक निजी क्लिनिक में ले गई।’ इसके बाद इजहार को एक निजी डॉक्टर ने बेतिया के सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसीएच) में रेफर कर दिया। जीएमसीएच के अधीक्षक डॉ प्रमोद के तिवारी ने बताया कि पीड़ित को भर्ती कराया गया था।’ उनकी मेडिकल स्लिप पर पेट में दर्द और उल्टी का जिक्र था।

खुलेआम बिकती है शराब- मृतक की पत्नी
देवरवा गांव के बिकाऊ मियां की जहरीली शराब ने जान ले ली। उनकी विधवा लाल बीवी ने कहा कि ‘यहां शराब खुलेआम बिकती है और उस दिन मेरे पति पीकर घर आए थे।इसके बाद वो बीमार पड़ गए और उनकी जान चली गई।’

‘बगैर पुलिस की जानकारी के शराब की बिक्री नामुमकिन’
देवरा में शराबकांड पीड़ित झूलन मियां की पत्नी सैफुलनिसा ने बताया कि ‘मेरे पति शराब पीकर घर आए थे और उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी।’ वहीं पर पंचायत समिति की पूर्व सदस्य सबीना खातून ने कहा कि ‘लोग यहां एक गांव के बगीचे में शराब पीने और जुआ खेलने के लिए इकट्ठा होते हैं। बहू-बेटियों का नशेड़ियों और जुआरियों ने चलना मुश्किल कर दिया है। बगैर पुलिस की जानकारी के ये कैसे मुमकिन है इलाके में शराब बिके?’

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सबीना ने बेतिया के एक नर्सिंग होम में भर्ती मुमताज मियां का जिक्र किया। शराब पीने के बारे में मुमताज के चचेरे भाई भोला के स्वीकारोक्ति पर ही पुलिस ने कांड एक मामला दर्ज किया था, जिसके बाद शराब माफिया नेटवर्क और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। सबीना ने कहा ‘होश में आने के बाद मुमताज की आंखों की रोशनी जा चुकी थी।

मंगूराहा में दो लोगों की आंख की रोशनी गई
मंगुराहा में टाइम्स न्यूज नेटवर्क की टीम को जहरीली शराबकांड में बचे दो और लोगों की आंखों की रोशनी जाने के बारे में पता चला। सुखल मियां (55) किसी तरह से पत्नी की मदद से घर के बाहर आए। उनके मुताबिक ‘मैं हरदिया (पड़ोसी गाँव) गया था और लक्ष्मण (शराब माफिया) की बनाई जगह पर एक ग्लास शराब पी थी। वहां 50 रुपये में एक ग्लास शराब बिक रही थी। शराब पीने के बाद मैं घर आया तो तबीयत बिगड़ गई और मुझे दिखाई देना बंद हो गया।

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एक पीड़ित को पुलिस उठा ले गई थी- वकील
इसी कांड में पीड़ित मुमताज के घरवाले तब परेशान हो गए जब वो सुबह क्लिनिक से छुट्टी दिए जाने के बावजूद घर नहीं पहुंचा। मुमताज के एक पारिवारिक मित्र और वकील रंजन ने रविवार देर शाम टाइम्स न्यूज नेटवर्क को बताया कि ‘उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और पूरे दिन बेतिया टाउन थाने में बंद कर दिया। काफी समझाने के बाद अब मुमताज को जीएमसीएच ले जाया जा रहा है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई है।’



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