आदमखोर होने की वन विभाग कर रहा जांच
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में पिंजरे में कैद हुआ एक और नर पैंथर
प्रतापगढ़. जिले के सीतामाता अभयारण्य के मोग्या आंबा गांव में वन विभाग के लगाए गए पिंजरे में कैद हुआ पैंथर ही आदमखोर है या अन्य पैंथर है। इसे लेकर अभी वन विभाग की ओर से इसकी भी जांच की जा रही है कि जो पैंथर पिंजरे में कैद हुआ है, वो आदमखोर ही है।

आदमखोर होने की वन विभाग कर रहा जांच
सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में पिंजरे में कैद हुआ एक और नर पैंथर
प्रतापगढ़. जिले के सीतामाता अभयारण्य के मोग्या आंबा गांव में वन विभाग के लगाए गए पिंजरे में कैद हुआ पैंथर ही आदमखोर है या अन्य पैंथर है। इसे लेकर अभी वन विभाग की ओर से इसकी भी जांच की जा रही है कि जो पैंथर पिंजरे में कैद हुआ है, वो आदमखोर ही है। मोग्याआंबा गांव में सोए हुए एक व्यक्ति पर हमले वाले स्थान पर पैंथर के बाल और पकड़े गए पैंथर के बाल की जांच के लिए लैब में भिजवाया गया है। जहां से इसकी पुष्टि होने पर ही विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उपवन संरक्षक(वन्यजीव) डॉ. टी मोहनराज ने बताया कि यहां अभयारण्य के जूनी रणा, पाल पंचायत के गांवों में गत तीन सप्ताह से एक पैंथर ने ग्रामीणों और मवेशियों पर हमले शुरू कर दिए थे। जिसमें एक महिला को मौत के घाट उतार दिया था। जबकि एक मासूम और एक युवक को घायल किया था। इस पर विभाग ने जुनी रणा इलाके में १२ पिंजरे और २० टे्रप कैमरे लगाए थे। एक पिंजरे में एक पैंथर कैद हो गया था। जो घायल अवस्था में था। इसे उदयपुर में बायोलॉजिकल पार्क में भिजवाया गया था। वहीं इसके दो दिन बाद से ही पाल पंचायत के धावड़ीघाटी, मोग्याआंबा गांवों में भी एक पैंथर के आदमखोर होने की जानकारी मिली। पैंथर ने तीन युवकों पर हमले किए। इस पर वन विभाग की ओर से यहां भी पिंजरे और ट्रेप कैमरे लगाए गए। वहीं मोग्याआंबा गांव में ६ अक्टूबर रात को कालू पुत्र लालिया मीणा अपने घर की छत पर रखवाली के लिए सोया हुआ था। पैंथर ने उस पर हमला किया। इसके बाद उसे घसीटकर पास ही झाडिय़ों में ले गया। जहां आधे शरीर का भक्षण किया। जबकि आधा शरीर वहीं छोड़ गया। दूसरे दिन ७ अक्टूबर की सुबह एक बालक पर भी हमला किया था। सूचना पर वन विभाग, पुलिस और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। जहां पीडि़त परिवारों को ढांढस बंधाया गया। वहीं स्थिति को देखते हुए जिस स्थान पर कालू के शव का आधा हिस्सा पड़ा था। वहां पास में ही एक पिंजरा भी लगाया गया। यहां ट्रेप कैमरे भी लगाए गए। इस पिंजरे के पास सात अक्टूबर शाम करीब सात बजे पैंथर आया और पिंजरे में बकरे को खाने के लालच में कैद हो गया। इस पर वन विभाग की टीम ने पैंथर को शुक्रवार को उदयपुर के बायोलोजिक पार्क में भिजवाया गया। वहीं दूसरी ओर विभाग की ओर से इसकी जांच की जा रही है कि जो पैंथर पिंजरे में कैद हुआ है, वही आदमखोर या अन्य है। इसके बाद ही विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई करेगा।
चार वर्ष का नर पैंथर
-यहां मोग्या आंबा में लगाए गए पिंजरे में कैद पैंथर नर है। जो करीब ४ वर्ष का है। यह पैंथर पूरी तरह से स्वस्थ्य है। जबकि पूर्व में कैद हुआ पैंथर घायल अवस्था में था। वो भी नर ही था।
-बड़े शिकार को आधा खाने के बाद दूसरे दिन खाता है पैंथर
उवपन संरक्षक डॉ. टी मोहनराज ने बताया कि अमुमन जब पैंथर बड़ा शिकार करता है। तो वह उसका पूरा भक्षण नहीं कर पाता है। ऐसे में बचे हुए शिकार को कहीं झाडिय़ों आदि में छुपा जाता है। जो दूसरे दिन अंधेरा होने पर उसका भक्षण करने आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए मोग्या आंबा में जिन झाडिय़ों में युवक के शव का आधा हिस्सा छोड़ा था। वहीं पास में ही पिंजरा लगाया गया।





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