– दोनों राज्यों के किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर मिलेगा पानी
-प्रदेश में सबसे अधिक पानी हाड़ौती के बांधों में, झालावाड़़ के बांध लबालब
– चम्बल नदी के सबसे बड़े बांध में इतना पानी की तीन साल तक सिंचाई को भरपूर पानी

झालावाड़। प्रदेश में मानसून की विदाई हो चुकी है। हाड़ौती के किसान रबी फसलों की बुवाई में जुट गए हैं। हाड़ौती और मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र के किसानों के लिए खुशखबर है कि चम्बल नदी के सबसे बड़े बांध गांधी सागर में इस बार में इतना पानी आ गया है कि आगामी तीन साल तक सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। चम्बल के चारों बांधों के पानी का राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच बंटवारा तय हो गया है। चम्बल के जल बंटवारे को लेकर मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मण्डल की तकनीकी कमेटी की मंगलवार को कोटा सीएडी सभागार में हुई बैठक में जल बंटवारा हो गया है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसानों को रबी की फसलों के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। नहरों में किसानों की मांग के अनुरूप पानी छोड़ा जाएगा। गांधी सागर में पर्याप्त पानी है। इस बार मार्च तक चम्बल की नहरों में जल प्रवाह किया जाना प्रस्तावित है। वहीं इस बार मानसून हाड़ौती में सबसे अधिक मेहरबान रहा है। झालावाड़ जिले में तो औसम से अधिक बारिश हुई है। जिले के सभी बांध पूरे भरे हैं। इसलिए जिले में सिंचाई और पेयजल की भरपूर पानी मिल सकेगा। अब नहरों की सार-संभाल शुरू कर दी गई है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डा. रामावतार शर्मा ने बताया कि हाड़ौती में इस बार अच्छी बारिश होने से रबी की बुवाई ज्यादा होने की संभावना है। संभाग में 12 लाख हैक्टेयर से अधिक बुवाई का लक्ष्य है। गेहूं, सरसों, लहसुन और चने की बुवाई पर जोर रहेगा।
कोटा संभाग के बांध लबालब
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार इस बार प्रदेश में सबसे अधिक पानी कोटा संभाग के बांधों में आया है। कोटा संभाग के 87 बांध है। जो 97.6 फीसदी भरे हुए हैं। दूसरे नम्बर पर उदयपुर संभाग के बांधों में पानी आया है। उदयपुर के बांध कुल क्षमता के 77.1 फीसदी भरे हुए हैं। जबकि जोधपुर के बांधों में इस बार सबसे कम पानी आया है। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार केवल 10.4 फीसदी ही पानी इस मानसून में आया है। ज्यादातर बांध खाली पड़े हैं।
झालावाड़ के सभी बांध पूरे भरे
मानूसन की सीजन में झालावाड़़ जिले के लोग बाढ़ की आपदा से परेशान है। अतिवृष्टि होने से खरीफ की ज्यादातर फसलें बर्बाद हो चुकी है। लेकिन खुशी की बात यह है कि रबी सीजन में जिले के किसानों को बांधों से सिंचाई के लिए भरभूर पानी मिल सकेगा। सभी बांध पूर्ण क्षमता से भरे हुए हैं। बारिश थमने के बाद भी आवक होने के कारण पानी की निकासी करनी पड़ रही है।
बढ़ेगा बुवाई का रका
हाड़ौती के सभी बांधों में भरपूर पानी होने के कारण इस बार रबी की बुवाई का आंकड़ा करीब 12 लाख हैक्टेयर को पार करने की संभावना है। कृषि खण्ड कोटा ने झालावाड़, कोटा, बूंदी और बारां जिले में रबी की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। इस बार हाड़ौती में गेहूं, सरसों और लहसुन का रकबा रिकॉर्ड तोड़ रहेगा। कोटा सीएडी कृषि खण्ड की ओर हर बार किसानों को लहसुन की बुवाई नहीं करनी की एडवाजरी जारी करता था। लेकिन इस बार गांधी सागर समेत चारों बांधों में पर्याप्त पानी है। इस कारण सिंचाई के लिए पानी की कटौती नहीं की जाएगी।

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