डूंगरपुर. वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण ने देश सहित विश्व भर की मुश्किलें बढ़ा दी है। संक्रमण का ग्राफ कम होने के बावजूद रोजगार की राह जटिल ही होती जा रही है। खासकर खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय दोहरी मार झेलने को मजबूर है। डेढ वर्ष से कुवैत में कार्यरत प्रवासी कुवैत सरकार के नए-नए झमेलों में उलझते जा रहे हैं। एक तरफ कोविड-19 के चलते हवाई यात्रा बंद होने से खाड़ी देशों में भारत आए युवा वापस जा नहीं पाने की वजह से बेरोजगार घुम रहे हैं। वहीं, कुवैत में कार्यरत वरिष्ठ नागरिकों के सामने भी देश न

डूंगरपुर. वैश्विक महामारी कोविड-19 संक्रमण ने देश सहित विश्व भर की मुश्किलें बढ़ा दी है। संक्रमण का ग्राफ कम होने के बावजूद रोजगार की राह जटिल ही होती जा रही है। खासकर खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय दोहरी मार झेलने को मजबूर है। डेढ वर्ष से कुवैत में कार्यरत प्रवासी कुवैत सरकार के नए-नए झमेलों में उलझते जा रहे हैं। एक तरफ कोविड-19 के चलते हवाई यात्रा बंद होने से खाड़ी देशों में भारत आए युवा वापस जा नहीं पाने की वजह से बेरोजगार घुम रहे हैं। वहीं, कुवैत में कार्यरत वरिष्ठ नागरिकों के सामने भी देश निकाले जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं। हर वर्ष लगाए जाने एकामा (कार्य करने का अनुबंध) के दामों में बढोतरी हो गई है। ऐसे में कुवैत में कार्यरत भारत के वरिष्ठ नागरिकों के सामने वतन वापसी के अलावा और कोई चारा नहीं रह गया है।
कुवैत में बढ़ी अनुबंध की राशि
कुवैत में दक्षिणी राजस्थान के डूंगरपुर-बांसवाड़ा सहित संभाग भर के हजारों युवा और वरिष्ठ नागरिक खादिम और साउन वीजा पर कार्यरत है और उसके आधार पर ही उनका घर-गुजारा चल रहा है। इसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक भी कार्यरत है। कुवैत सरकार ने कोरोना की पहली लहर के दौरान प्रवासी वरिष्ठ नागरिकों को स्वदेश भेजने का मानस बनाते हुए उनका एकामा (अनुबंध) आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया था। पर, दो माह से कुवैत सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए प्रवासी वरिष्ठ नागरिकों को कुवैत में रहने की सशर्त मंजूरी दी है। कुवैत में कार्यरत प्रवासी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एकामा के दाम बढ़ा दिए हैं। अब उन्हें एक वर्ष के लिए 1800 दीनार अर्थात करीब साढ़े चार लाख रुपए होते हैं। जबकि, इतना मुनाफा वर्ष भर मेहनत के बाद नहीं हो पाता है। ऐसे में मजबूरन उनके सामने कुवैत को अलविदा कहने के अलावा और कोई चारा नहीं रह जाता है। वहीं, कुवैत में खादीम की वीजा पर कार्यरत प्रवासियों को एकामाके भाव चार सौ दीनार बढ़ाते हुए करीब नौ सौ दीनार अर्थात करीब सवा दो लाख रुपए कर दिए हैं। जबकि, इससे पूर्व कोई दाम तय नहीं थे। दामों में करीब पांच से छह गुना बढ़ोतरी कर दी है।
इनके नहीं बढ़े दाम
कुवैत में साउन की वीजा में कार्यरत युवाओं की ओर से प्रतिवर्ष लगने वाले एकामे के भाव में अभी तक बढोतरी नहीं हुई है। इन युवाओं के एकामे के लगभग साल भर में 170 दीनार अर्थात करीब 40 हजार रुपए का खर्च ही आ रहा है।
स्वदेश आने के लिए भाड़ा दुगुना
स्वदेश आने के लिए भाड़ा दुगुनास्वदेश आने के लिए भाड़ा दुगुनास्वदेश आने के लिए भाड़ा दुगुनास्वदेश आने के लिए भाड़ा दुगुनास्वदेश कुवैत में कार्यरत वरिष्ठ नागरिकों के एकामा के भाव में बढोतरी होने से वह कुवैत छोड़कर अपने देश आ रहे हैं। पर, कोरोना संक्रमण के चलते सभी देशों ने अपनी हवाई यात्राएं बंद कर रखी हैं। ऐसे में कुवैत से प्रतिदिन एक हवाई जहाज प्रवासियों को भारत देश ला रहा है। रिर्टन में यात्री नहीं मिलने से लौट रहे वरिष्ठ नागरिकों से दुगुना किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में एक तरफ रोजगार से हाथ गंवा बैठे वरिष्ठ नागरिकों को किराये की भी मार पड़ रही है।
साउन व खादिम वीजा
कुवैत में प्रवासियों को कार्य करने के लिए वीजा लेनी जरूरी होती है। वहां एक साउन और दूसरी खादीम की वीजा मिलती है। साउन की वीजा से दुकानों, सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में कार्य कर सकते हैं। वहीं, खादीम की वीजा घर में कार्य करने के लिए होती हैं। खादीम की वीजा पर आने वाले लोग दुकानों में कार्य नहीं कर सकते हैं। अगर खादीम की वीजा में दुकानों में कार्य करते हुए पाए जाने पर पुलिस गिरफ्तार कर लेती है।
एकामा की आधी अवधि वतन में ही गुजरी
वैश्विक महामारी कोरोना के चलते कुवैत सरकार ने लॉकडाउन में अपने देश लौटे प्रवासियों के लिए एक सुविधा मुहैया करवाई थी। इसमें ऑनलाइन एकामा लगवाया था। इस दौरान कई प्रवासियों ने आनलाइन राशि भर कर एकामा लगा दिया। इस दौरान वाया दुबई से हवाई यात्रा शुरू भी की गई और कई प्रवासी कुवैत भी गए। पर, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के साथ ही सभी देशों ने एक बार फिर हवाई यात्राएं बंद कर दी। इस दौरान अपने वतन आए प्रवासी वापस यही ही रह गए। पांच से छह माह गुजर रहे हैं। जल्द ही हवाई यात्रा शुरू नहीं हुई तो उनको फिर कुवैत जाने के लिए ऑनलाइन एकामा लगाना पड़ेगा।आने के लिए भाड़ा दुगुना









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