चौपट कर दी रोट रोग ने प्याज की फसल
किशनगढ़ के आस-पास के गांवों में प्याज की फसलें हुई खराब

मदनगंज-किशनगढ़/हरमाड़ा ञ्च पत्रिका.
कस्बे सहित तिलोनिया, फलोदा, पाटन, नोहरिया एवं मुंडोती गांव में प्याज की फसलों में रोट (रहट) रोग फैला हुआ है। इस रोग ने ना केवल प्याज की फसलों को चौपट कर दिया, बल्कि फसलें खराब होने से किसानों को भी आर्थिक नुकसान हो गया। इन क्षेत्रों में प्याज की फसल बोने वाले कई किसान कर्जदार हो गए है।
किशनगढ़ के इन ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने करीब 40 से 45 दिन पूर्व करीब 50 हेक्टेयर भूमि से अधिक में प्याज की फसल का रोपण किया था। लेकिन रोपण के करीब 15 दिन बाद ही फसलों में रोट (रहट) रोग के लक्षण दिखाई देने लगे एवं खेतों में खड़ी प्याज की फसल तेजी से खराब होने लगी। रोग के कारण कुछ ही दिनों में हरे भरे दिखने वाले खेत पहले पीले नजर आने लगे और अब यह सभी खेत खाली खाली दिखने लगे। किसानों ने अपनी फसलों को बचाने के लिए महंगी दवाओं का प्रयोग भी किया, लेकिन फसल को खराब होने से नहीं बचा सके। इस रोग का सर्वाधिक असर पाटन, पेड़ीभाटा व मुंडोती और इनसे सटे गांवों के खेतों में प्याज की फसलों में देखने को मिला है। पाटन गांव के काश्तकार गणेश यादव, अर्जुन लोछब, सत्यनारायण, पांचूराम एवं रामलाल सहित करीब तीस से अधिक किसानों की प्याज की फसलें इस रोग से नष्ट हो चुकी है। किसान रामसिंह यादव ने बताया कि उसने 4 बीघा में प्याज की कणी (बीज) का रोपण किया था और फसल बोने के लिए तीस हजार का बीज एवं करीब पंद्रह हजार रुपए खेत तैयार कर बीज रोपण में खर्च किए। फसल पनप भी अच्छी रही थी, लेकिन रोपण के करीब पन्द्रह दिन बाद ही फसल को इस रोग चपेट में ले लिया। फसल को बचाने के लिए दवाइयों का खर्चा भी किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ और अब पूरी फसलें पीली पड़कर सिमटती गई। खेत स्वत: ही खाली दिखाई देने लगे है। तिलोनिया के मंगलाराम जाट, गोपीराम माली, फलोदा के राजेन्द्र माली एवं मूलचंद भाकर सहित अन्य किसानों ने इसी तरह प्याज की फसल का रोपण किया था। लेकिन रोग लग जाने के कारण पूरी प्याज की फसल नष्ट हो गई।
बार बार बदलते मौसम से पनपा रोग
सहायक कृषि अधिकारी पाटन कैलाशचंद शर्मा ने बताया कि लगातार कई दिनों तक में बादल छाए रहने, बार-बार बूंदाबांदी होने व मौसम में नमी होने से यह रोट (रहट) रोग प्याज की फसलों में पनपा है। पहले यह एक-दो पौधों में होता है और फिर संक्रमण की भांति यह बीमारी की तरह तेजी से पूरे खेत में फैलता है। फसल पीली होकर नष्ट हो जाती है और खेत खाली दिखाई देने लगता है। सहायक कृषि अधिकारी शर्मा ने बताया कि इससे पूर्व इस रोग का इतना व्यापक प्रकोप पहले कभी नहीं देखा गया। लेकिन इस बार तो यह रोग बड़े पैमाने पर और बड़ी तेजी से प्याज की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। इससे 60 फीसदी से 100 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है। इस रोग के कारण लाखों की फसल बर्बाद हो चुकी है। इससे किसान और प्याज के काश्तकार काफी परेशान है। इस क्षेत्र में प्याज की सर्वाधिक फसल पाटन एवं आस-पास के गांवों में ही होती है एवं प्रतिवर्ष प्याज की फसलों का रोपण किया जाता है।
उम्मीद अच्छी, लेकिन बीमारी ने किया खराब
इस बार भी किसानों ने अच्छी आमदनी की आस में ज्यादातर भूमि पर प्याज की फसल का रोपण किया। अच्छी पैदावार की उम्मीद में किसानों ने कर्ज लेकर कणी (बीज) व मजदूरों की व्यवस्था की थी। लेकिन अब फसल बर्बाद होने से एक किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है साथ ही कर्जभार की भी चिंता सतानें लगी है।





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