जिला एवं सत्र न्यायालय चित्तौडग़ढ़ ने प्रतापगढ़ के अधिवक्ता गिरिराज जोशी की गोली मारकर हत्या करने के बहुचर्चित मामले में आठ में से छह आरोपियों को मंगलवार को आजीवन कारवास व अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इन सभी आरोपियों को न्यायालय ने बारह दिन पहले एक अक्टूबर को दोषी करार दिया था।

चित्तौडग़ढ़.
जिला एवं सत्र न्यायालय चित्तौडग़ढ़ ने प्रतापगढ़ के अधिवक्ता गिरिराज जोशी की गोली मारकर हत्या करने के बहुचर्चित मामले में आठ में से छह आरोपियों को मंगलवार को आजीवन कारवास व अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इन सभी आरोपियों को न्यायालय ने बारह दिन पहले एक अक्टूबर को दोषी करार दिया था।
लोक अभियोजक सुरेशचन्द्र शर्मा ने बताया कि प्रकरण के अनुसार ६ जनवरी २००७ को सायं ६.४५ बजे प्रतापगढ़ के अधिवक्ता गिरिराज पुत्र मदनलाल जोशी अपने कार्यालय में बैठे हुए थे। कार्यालय में उनके साथ विशाल सालवी, राहुल कबाड़ी व नरेन्द्र कबाड़ी भी बैठे हुए थे। अचानक एक व्यक्ति आया और आते ही छोटे हथियार से अधिवक्ता जोशी पर फायर कर दिया। गोली उनकी दाहिनी पसली और कनपटी पर लगी, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। आरोपी बाहर मोटरसाइकिल लेकर खड़े अपने साथी के साथ मंदसौर नाके की तरफ भाग छूटा। विशाल सालवी ने यह सूचना पुलिस को दी। इस संबंध में कोतवाली में प्रकरण दर्ज हुआ।

इन आरोपियों को किया गिरफ्तार

प्रतापगढ़ की कोतवाली पुलिस ने मामले में अनुसंधान करने के बाद इस मामले में अलग-अलग समय में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चार आरोप-पत्र न्यायालय में पेश किए। सबसे पहले आरोपी बड़ी होली (मंदसौर) निवासी भाउद्दीन उर्फ बाउद्दीन पुत्र अब्दुल शकूर, नौगांवा (अरनोद) निवासी वसीम खां पुत्र नियामत खां पठान, अखेपुर (अरनोद) निवासी अमीन खां पुत्र जानस खां पठान, खेराड़ी मोहल्ला प्रतापगढ़ निवासी शाकिर पुत्र शफी मोहम्मद, नौगांंवा निवासी चुन्नू उर्फ इमरान खां पुत्र डेरान खां तथा मुस्तफा पुत्र मेहमूद खां को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में न्यायालय में चालान पेश किया। इसके बाद प्रतापगढ़ निवासी प्रेम मोहन पुत्र चिमन कुमार सोमानी व गुलाम अब्बास पुत्र फिदा अली बोहरा को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। बाद में प्रतापगढ़ के अखेपुर निवासी रोशम खां पुत्र अमीन खां को तथा नौगांवा निवासी बबलू उर्फ शराफत उल्ला पुत्र डेरान खां को गिरफ्तार कर लिया। मामले में कुल दस आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। बाद में उच्च न्यायालय के निर्देश पर यह मामला जिला एवं सत्र न्यायालय चित्तौडग़ढ़ में स्थानांतरित कर दिया। उभय पक्षों को सुनने के बाद एक अक्टूबर २०२१ को जिला एवं सत्र न्यायाधीश केशव कौशिक ने अपने फैसले में आरोपी वसीम, बबलू, शाकिर, मुस्तफा, गुलाम अब्बास, प्रेम मोहन, चुन्नू उर्फ इमरान तथा रोशम खां को हत्या व हत्या के षडय़ंत्र सहित विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से १८३ दस्तावेज प्रदर्शित करवाए गए व मौखिक साक्ष्य के रूप में १०२ गवाह करवाए गए। इस दौरान १७ मई २०१६ को आरोपी भाउद्दीन उर्फ बाउद्दीन की तथा ५ अगस्त २०१९ को अमीन खां की मृत्यु हो जाने से इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। लोक अभियोजक शर्मा ने बताया कि आरोपी वसीम और शाकिर अनुपस्थित रहे, जिनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर न्यायालय ने चित्तौडग़ढ़ व प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए। जिन्हे बाद में सजा सुनाई जाएगी। न्यायालय ने चुन्नू उर्फ इमरान, मुस्तफा, गुलाम अब्बास, रोशम, बबलू उर्फ शराफत तथा प्रेम मोहन सोमानी को धारा ३०२, १२० बी व ४६० के तहत आजीवन कारावास व बीस-बीस हजार रूपए अर्थदण्ड से दण्डित किया है। इसके अलावा इमरान और रोशम को आम्र्स एक्ट के तहत भी पांच साल के कारावास व दस-दस हजार रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है।

धार्मिक स्थल से सटी दस बीघा जमीन को लेकर था विवाद

लोक अभियोजक शर्मा ने बताया कि पुलिस अनुसंधान में सामने आया कि अधिवक्ता गिरिराज जोशी धार्मिक स्थल के पास ही स्थित दस बीघा जमीन के मामले में खातेदार के अधिवक्ता थे और राजस्व न्यायालय में इस जमीन का वाद भी चला। प्रतापगढ़ में अंजुमन कमेटी के तत्कालीन सदर अमीन खां से संपर्क कर धार्मिक स्थल के पास वाली जेनुल आबेद्दीन के खातेदारी की दस बीघा जमीन प्रतापगढ़ निवासी शाकिर हुसैन बोहरा को बेच दी गई। इस जमीन जमीन को लेकर शाकिर बोहरा ने अधिवक्ता जोशी को पॉवर ऑफ एटोर्नी सम्पूर्ण कार्य के लिए दे रखी थी। पास ही स्थित होने से धार्मिक स्थल की कमेटी इस जमीन को लेना चाहती थी। इसके लिए अधिवक्ता जोशी से वार्ता और समझौतों के दौर भी चले, लेकिन समझौते सफल नहीं हो सके। अंतिम बार समझौता एक बीघा जमीन व पच्चीस लाख रूपए देने के संबंध में हुआ। बाद में शाकिर बोहरा, मृतक अधिवक्ता जोशी, आरोपी अमीन, बबलू, रोशम आदि ने दोनों पक्षों से जमीन की साठ व चालीस प्रतिशत भागीदारी तय कर दी। इस बात को लेकर विवाद होता रहा और अंत में आरोपियों ने समझौते में अड़चन मानते हुए अधिवक्ता जोशी को रास्ते से हटाने का षडय़ंत्र रचने के बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी।





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