मनीष सिंह, मिर्जापुर
वर्तमान समय में किसी जिलें में तैनात डीएम का कार्यकाल बहुत कम ही होता है। 6 महीने टिके रह जाएं यही काफी है, लेकिन वहीं मिर्जापुर जिले में एक डीएम 13 साल तक कलेक्टर के पद पर तैनात रह चुके हैं। उनके नाम से आज भी एक थाना तो एक प्रसिद्ध फॉल जाना जाता है।

महामारी को दूर करने में हुए थे कामयाब
आज से लगभग एक सौ बीस वर्ष पहले सन 1900 के आस-पास मिर्जापुर अकाल और प्लेग महामारी की भारी मुसीबत से जूझ रहा था। उसी समय 1900 में पर्सी विन्ढम (पी विंढम ) कलेक्टर बन कर आए। उन्होंने अपनी कार्य कुशलता से इन दोनों बीमारियों पर विजय प्राप्त कर ली थी।

13 साल तक जिले के रहे कलेक्टर
पी विंढम 17 वर्षों तक मिर्जापुर से जुड़े रहे। इसके पहले ब्रिटिश हुकूमत ने 1894 से 1897 तक उन्हें राजा बनारस की रियासत के हिस्से में आने वाले मिर्जापुर का डिप्टी सुपरिटेंडेंट बनाकर भेजा था। फिर उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए 1900 में मिर्जापुर का कलेक्टर बना दिया। पी विंढम 1900 से लेकर 1913 तक के जिले के कलेक्टर रहे। मिर्जापुर के प्रशासनिक इतिहास में पर्सी विन्ढम सबसे अधिक समय तक रहने वाले कलेक्टर रहे।

आज भी उनके नाम से जाना जाता है फॉल और थाना
विन्ढम के मिर्जापुर से गहरे लगाव के चलते यहां के एक प्रसिद्ध फॉल का नाम विन्ढम फॉल रखा गया और यहीं पर 1914-15 के दौरान इण्डो-ब्रिटिश स्थापत्य शैली में एक सुंदर से डाक बंगले का निर्माण भी कराया था। यहीं नहीं उनके नाम पर सोनभद्र जिलें में स्थित एक थाने का नाम भी विंढमगंज है। बता दें कि उस समय सोनभद्र जिला मिर्जापुर का ही हिस्सा हुआ करता था।

जिम कार्बेट से थी उनकी गहरी दोस्ती
पी विन्ढम शिकार के शौकीन थे। उनकी विख्यात शिकारी जिम कॉर्बेट के बीच गहरी दोस्ती थी। जिम कार्बेट ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक Man-Eaters of Kumaon में उन्होंने पी विंढम के बारे में लिखा भी है। विंढम को बाघों के बारे में अच्छी जानकारी भी थी।

इनाम में दिया था तोप
मिर्जापुर जिले के निवासी बिहारलाल सिंघानिया अंग्रेजों के करीबी थे। बताया जाता है कि प्रथम विश्वयुद्ध में उनके सराहनीय कार्य से खुश होकर तत्कालीन कलेक्टर पी विंढम ने बिहारी लाल सिंघानिया को राय साहब की उपाधि दी थी और तोहफे के रूप में एक तोप भेंट की थी और उसका लाइसेंस भी दिया था। यह तोप का छोटा मॉडल भर है। जिसे टॉयज तोप कहा जाता है ,लेकिन इसके प्रहार से दीवाल भी गिराई जा सकती है। बिहारी लाल की मौत के बाद उनके पोते महेश सिंघानिया के पास यह तोप है।

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विलासिता का जीवन था पसन्द
पत्रकार सलिल पांडे कहते हैं कि उस समय भौगोलिक स्थिति जिले की काफी अलग थी। सोनभद्र भी मिर्जापुर का हिस्सा हुआ करता था। सलिल ने बताया कि विंढम काफी कठोर कलेक्टर थे और वह विलासिता का जीवन जीते थे।

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अंग्रेजों ने सम्मान करने के बहाने लिया इस्तीफा
इंग्लैंड से जब भी उनके तबादले का पत्र आता था तो वह उसे फड़वा देते थे। जिसके चलते उन्हें सम्मान करने के लिए उन्हें इंग्लैंड बुलाया गया और वहीं पर उनका इस्तीफा लेकर दूसरे को मिर्जापुर का कलेक्टर बनाकर भेज दिया गया।



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