हाइलाइट्स

  • यूपी के दूसरे जिलों की तरह मिर्जापुर जिले में भी कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है
  • इसके बावजूद अभी तक मंडलीय अस्पतालों में ओपीडी सेवा शुरू नहीं हो पाई है
  • ऐसे में इलाज कराने के लिए मरीजों को प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है
  • निजी अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं

मनीष सिंह, मिर्जापुर
यूपी के दूसरे जिलों की तरह मिर्जापुर जिले में भी कोरोना की दूसरी लहर थम चुकी है। इसके बावजूद अभी तक मंडलीय अस्पतालों में ओपीडी सेवा शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे में इलाज कराने के लिए मरीजों को प्राइवेट अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

चार महीने से बंद है सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवा
बतादें कि पिछले चार महीनों से कोरोना के चलते ओपीडी सेवा बन्द है । वर्तमान में केवल इमरजेंसी वार्ड में ही मरीजों को देखा जा रहा है, जिसके चलते इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों पर काम का बोझ बढ़ रहा है। इन डॉक्टरों के सामने चुनौती है कि वह इमरजेंसी केस देखें कि सामान्य बीमारी के मरीजों का इलाज करें।

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प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर मरीज

सामान्य दिनों में मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल में प्रतिदिन 1200 से 1500 के बीच मरीजों को ओपीडी में देखा जाता था। यहां इलाज के लिए भदोही, सोनभद्र और एमपी तक के लोग यहां इलाज कराने यहां आते थे। लेकिन अभी इमरजेंसी में 100-200 मरीजों तक को ही देखा जा रहा है ।

शासन से नहीं मिले कोई निर्देश
मंडलीय अस्पताल के अधीक्षक डॉ कमल कुमार ने बताया कि अभी फिजिशियन की ओपीडी सेवा नहीं शुरू हुई है। इसके चालू करने के लिए शासन स्तर से कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। हालांकि डॉ कमल ने बताया कि हमारे फिजिशियन डॉक्टर ‘फीवर डेस्क’ में बैठते हैं। जहां पर वह सर्दी जुकाम, बुखार आदि सामान्य बीमारियों के मरीजों को देख रहे हैं और उनका इलाज भी कर रहे हैं।

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