कानपुर
उत्तर प्रदेश के कानपुर में बीजेपी नेता का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में बीजेपी नेता अपने समर्थकों के साथ पुलिस कस्टडी से एक पेशेवर अपराधी को छुड़ा कर भगा देता है। इस मामले में करीब 21 घंटे के विचार मंथन के बाद बीजेपी ने नारायण सिंह भदौरिया को जिला मंत्री के पद से हटा दिया है।

बीजेपी ने पूरे मामले में तीन सदस्यों की जांच कमिटी गठित की है। यह जांच कमिटी 24 घंटे में अपनी जांच रिपोर्ट क्षेत्र और प्रदेश यूनिट को देगी। कानपुर साउथ प्रेजिडेंट बीना आर्य ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद बीजेपी आगे ऐक्शन लेगी।

जिला मंत्री का था बर्थडे
भाजपा दक्षिण के जिलामंत्री नारायण सिंह भदौरिया का बीते बुधवार को जन्मदिन था। नौबस्ता के उस्मान स्थित एक गेस्ट हाउस में जिलामंत्री के जन्मदिन की पार्टी चल रही थी। पार्टी में शामिल होने के लिए बर्रा थाने से वांछित हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह भी पहुंचा था।

पुलिस के साथ की धक्कामुक्की

बताया जा रहा है कि नौबस्ता पुलिस को इसकी भनक लगी कि हिस्ट्रीशीटर मनोज पार्टी में शामिल होने के लिए आया है। पुलिस की एक टीम सादे कपड़ों में उसे दबोचने के लिए पहुंच गई। पुलिस ने मनोज सिंह को दबोच लिया और पकड़कर ले जाने लगी। बस यही बात नेता जी को नागवार गुजरी। जिलामंत्री अपने समर्थकों के साथ पुलिस टीम का घेराव कर लिया। पुलिस के साथ धक्कामुक्की कर पेशेवर अपराधी को छुड़ा लिया।

बीजेपी का पत्र

बीजेपी को बचाने का पुलिस ने किया प्रयास
जिलामंत्री नारायण सिंह भदौरिया को रूतबा देखने को मिला। पहले पुलिस ने भाजपा नेता को बचाने का प्रयास किया, प्रेस रिलीज जारी कर कहा गया कि 25,000 के इनामी बदमाश हिस्ट्रीशीटर मनोज उस गेस्ट हाउस से 100 मीटर की दूरी पर पान की दुकान पर खड़ा था।

10-15 साथियों के साथ पुलिस जीप पर बोला हमला
चौकी प्रभारी उस्मानपुर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मनोज सिंह को पकड़कर जीप में बैठाने लगे, इसी दौरान उसके कुछ साथी जीप के आगे लेट गए। पुलिसकर्मी जीप के आगे लेटे लोगों को हटाने लगे, इसी दौरान उसके 10 से 15 साथियों ने मिलकर उसे पुलिस के वाहन उतार कर भगा दिया। अभियुक्त का किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं है।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस बैकफुट पर आई
भाजपा नेता और उसके समर्थकों की करतूत सोशल मीडिया वायरल हो चुकी थी। पुलिस के साथ अभद्रता और पेशेवर बदमाश को किस तरह से पुलिस अभिरक्षा से भगाया। पुलिस ने भाजपा नेता को छोड़कर बाकी लोगों को चिन्हित कर केस दर्ज किया। सोशल मीडिया पर लोगों के तीखे कमेंट्स आने लगे। पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने लगे। पुलिस बैकफुट पर आ गई।

नारायण सिंह की तलाश में छापेमारी
वायरल वीडियो जब पुलिस कमिश्नर असीम अरूण ने देखा तो उन्होने वायरल वीडियो के आधार पर भाजपा नेता नारायण सिंह भदौरिया को पुलिस अभिरक्षा से पेशेवर अपराधी को भगाए जाने का दोषी पाया। पुलिस नारायण सिंह भदौरिया को अरेस्ट करने के लिए दबिश दे रही है।

19 के खिलाफ केस दर्ज, जिसमें से 09 नामदर्ज है
दारोगा सुभाषचंद्र की तहरीर 09 नामजद समेत 19 पर केस दर्ज किया गया है। जिसमें मनोज सिंह जिसपर 27 मुकदमें दर्ज हैं। रॉकी, रॉबिन सक्सेना, धीरू शर्मा, बाबा ठाकुर, गोपाल शरण सिंह चौहान, विकास तिवारी, आदित्य दीक्षित, राजवल्लभ पांडेय समेत 19 के खिलाफ सरकारी काम में बाधा, बलवा, पलिस से अभद्रता, पुलिस कस्टडी से आरोपी को भगाने और महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। इसमें से जितने भी नाम है, उन पर पहले से ही कई मुकदमें दर्ज हैं। इसके साथ ही नारायण तिवारी और गेस्ट हाउस संचालक पर महामारी एक्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया हैं। जन्मदिन पार्टी के लिए भाजपा नेता और गेस्ट हाउस संचालक ने पुलिस से अनुमति नहीं ली थी।

नारायण भदौरिया पर दर्ज हैं केस
जिलमंत्री नारायण भदौरिया पर का विवादों से पुराना रिश्ता है। नारायण भदौरिया पर किदवई नगर, बाबूपुरवा और लखनऊ गाजीपुर थाने में लगभग आधा दर्जन मुकदमें दर्ज हैं। लखनऊ के शरद मिश्रा ने नारायण भदौरिया पर मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि नारायण सिंह के उनकी पत्नी से अवैध संबंध है, विरोध करने पर 2017 में जान से मारने का प्रयास किया गया था। गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने कुर्की के आदेश जारी किए थे।



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