वार्ता में बनी सहमति

पटवारियों के लिए एक नया पद सृजित किए जाने का निर्णय

जयपुर, 3 जुलाई
राजस्थान पटवार संघ के बैनर तले चल रही पटवारियों की हड़ताल शनिवार को समाप्त हो गई। पटवार संघ के प्रतिनिधिमंडल की मुख्य सचिव निरंजन आर्य के साथ हुई बैठक के बाद हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया। संघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र निमिवाल,प्रदेश उपाध्यक्ष दिलीप कुमार दक, प्रदेश संघटन मंत्री विमला मीणा, प्रदेश क्षेत्रीय सलाहकार सुभाषचंद्र जांगिड़, अजमेर राजस्थान कानूनगो संघ के जिलाध्यक्ष जगदीश प्रसाद शर्मा और प्रदेश क्षेत्रीय सलाहकार मनोज कुमार और राजस्थान कानूनगो संघ के प्रदेशाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह इस वार्ता में शामिल हुए। वार्ता में पटवारियों के लिए एक नया पद सृजित किए जाने का निर्णय लिया गया। यह पद वरिष्ठ पटवारी का होगा। जिससे पटवारियों के कामकाज में मजबूती आएगी।
इन मांगों पर भी बनी सहमति
: पटवारी कैडर में व्याप्त स्थिरता को दूर करने की दृष्टि से पदोन्नति का एक और चैनल बनाया जाएगा। जिसके तहत राज्य में वरिष्ठ पटवारी के पदों का सृजन किया जाएगा।
: पटवारियों को देय अतिरिक्त कार्य भत्ता और वित्तीय समस्याओं के समाधान के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा जो तीन माह में अपनी रिपोर्ट देगी।
: राजस्व विभाग से जुड़ी पटवारियों की गैर वित्तीय समस्याओं के समाधान के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा जो कि तीन माह में अपनी रिपोर्ट देगी।
: पटवारियों की ओर से की जा रही हड़ताल और आंदोलन के कारण मुकदमों को वापस लेने पर विचार किया जाएगा।

राजस्व तंत्र की रीढ़ कहलाते हैं पटवारी
राजस्व महकमे की रीढ़ कहलाने वाले पटवारियों का कामकाज काश्तकार और आमजन के महत्वपूर्ण हितों से जुड़ा हुआ है। खेती बाड़ी की जमीन सहित सभी तरह की जमीनों के नाप जोख और राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट करने जैसा महत्वपूर्ण काम इनके जिम्मे हैं। गौरतलब है कि पटवारी काफी लंबे समय से ग्रेड पे 3600 किए जाने, पदोन्नति में समय सीमा 7,14,21,28,32 वर्ष किए जाने तथा नो वर्क नो पे आदेश को वापस लिए जाने की मांग कर रहे थे। अपनी मांगों को लेकर उन्होंने एक मार्च से राजस्व कार्य के बहिष्कार का एलान किया था। इसके बाद शहीद स्मारक पर धरना दिया था लेकि कोविड के बढ़ते केसों के कारण धरने को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। पिछले दिनों एक बार फिर पटवारियों ने चेतावनी दी कि थी कि 5 जुलाई कि उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वह एक बार फिर आंदोलन करेंगे और राज्यपाल से इच्छा मृत्यु की मांग करेंगे।





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