हाइलाइट्स

  • राजस्थान में कोटा एसीबी की बडी कार्रवाई
  • मुखबिर की सूचना पर कोटा एसीबी ने बिछाया जाल
  • कोटा शहर में चंबल हैंगिंग ब्रिज टोल प्लाजा पर वाहन चैकिंग करते पकडा गया IRS डॉ. शशांक यादव
  • 16,32,410 रुपए एसीबी ने किए बरामद
  • रकम के बारे में यादव नहीं दे सका संतुष्ट जवाब, पूछताछ जारी, हुई गिरफ्तारी

कोटा, अर्जुन अरविंद
राजस्थान में शनिवार को कोटा एसीबी ने बडी कार्रवाई की। एसीबी ने इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) अधिकारी और उत्तर प्रदेश की गाजीपुर व मध्यप्रदेश की नीमच अफीम फैक्ट्री के जीएम डॉ. शशांक यादव को 16 लाख 32 हजार 410 रूपए की रकम के साथ दबोच लिया। इस दौरान पकड़े गए आरोपी इतनी रकम कहां से लेकर लाए , पकडे जाने पर कोटा एसीबी को संतुष्ट जवाब नहीं दे पाए।

एसीबी को मिली थी मुखबीर से सूचना
इधर जानकारी मिली है कि इस मामले में एसीबी को मुखबीर से सूचना मिली थी। लिहाजा कोटा एसीबी ने शहर के पास चंबल नदी के हैंगिंग ब्रिज टोल प्लाजा पर जाल बिछाया और उदयपुर की ओर से आ रही पुलिस लोगो लगी स्कॉर्पियो गाडी नंबर यूपी 83 वाय 7851 रूकवा लिया। एसीबी टीम ने वाहन की चेकिंग की , जिसमें डॉ. शशांक यादव बैठा हुआ था। एसीबी की टीम को वाहन की तलाशी ली, तो वह सकपका गया।

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मिठाई के डिब्बे में मिले 15 लाख
एसीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब आकस्मिक चैकिंग अधिकारी अजीत बगडोलिया ने छानबीन की, तो डॉ. यादव के बेग में मिठाई का डिब्बा मिला। इसमें 15 लाख रूपए की मोटी रकम एक साथ मिली। लैपटॉप व पर्स से 1 लाख 32 हजार 410 रूपए भी मिले। डॉ. यादव कोटा एसीबी की कस्टडी में है, जिससे पूरे मामले में गहनता से पूछताछ की जा रही हैं। साथ ही डॉ यादव को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया है।

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आरोपी यूपी- एमपी की अफीम फैक्ट्रियों का है जीएम
कोटा एसीबी ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ठाकुर चंद्रशील कुमार ने बताया कि आरोपी आईआरएस डॉ. शशांक यादव उत्तर प्रदेश के इलाहबाद का रहने वाला है। साथ ही यूपी के गाजीपुर और एमपी नीमच की अफीम फैक्ट्रियों का जीएम है। हमे सूचना मिली थी कि आरोपी शख्स कार में बड़ी रकम लेकर जा रहा है, इसी आधार पर कार्रवाई की गई, तो इस संबंध में खुलासा हो गया।

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लाइसेंसी अफीम काश्तकारों ने राशि लेने की बात आ रही है सामने
ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी। अफीम फैक्ट्री नीमच में पूरे मध्यप्रदेश व राजस्थान के भारत सरकार के नारकोटिक्स विभाग के लाइसेंसी अफीम काश्तकारों की अफीम जमा की जाती हैं। वर्तमान में अफीम फैक्ट्री नीमच में इस साल अफीम देने वाले मध्यप्रदेश व राजस्थान के काश्तकारों की अफीम के सैंपलों की जांच का काम चल रहा हैं। अफीम सैंपलों की जांच के बाद अफीम की गाढता व मारफीन प्रतिशत के हिसाब से ही अफीम काश्तकारों को भुगतान किया जाता हैं। गाढता व मारफीन प्रतिशत के हिसाब से ही नारकोटिक्स विभाग द्वारा अफीम काश्तकारों को 6 आरी, 10 आरी, 12 आरी के पटटे वितरित करते हैं। यह आशंका है कि काश्तकारों को पट्टे देने की एवज में ही रिश्वत ली गई थी ,वहीं जब्त की गई राशि का संबंध भी इसी से जुड़ा है, जो चितौडगढ, प्रतापगढ, कोटा व झालावाड के अफीम काश्तकारों से वसूली गई हैं।

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ऐसे होता है खेल
पता चला है कि विभाग की ओर से लाइसेंसी अफीम काश्तकारों की पहले आरी पट्टा दिया गया है । पहले अफीम की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ऐसे में जो किसान रूपए नहीं देता, ये लोग उसकी अफीम को घटिया बता देते हैं या गाढता व मारफीन प्रतिशत कम कर देते हैं। साथ ही इसी एवज में रिश्वत का खेल भी चलता है। जानकारी मिली है कि आईआरएस की ओर से भी इसी तरह रिश्वत के तंत्र को चलाया जा रहा था।

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किसानों से जरिए उखाडेगी एसीबी भ्रष्टाचार की परत
अफीम लैब के अजीत सिंह व कोडिंग टीम के दीपक कुमार यादव ने दलालों के माध्यम से 6 हजार से ज्यादा अफीम उत्पादक किसानों से 10 से 12 आरी के पटटे दिलवाने के नाम पर 30 से 36 करोड रूपए एडवांस वसूल कर लिए है। हालांकि अभी 40 हजार से ज्यादा अफीम उत्पादक किसानों की अफीम की जांच होना बाकी हैं। बताया जा रहा है कि कोटा एसीबी आने वाले दिनों में किसानों से भी इस मुद्दे पर जानकारी जुटाएगी।

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