जयपुर
प्रदेश में कोरोना की रफ्तार अभी धीमी है, लेकिन खतरा टला नहीं है, लिहाजा इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की ओर से सतर्कता बरती जा रही है। उल्लेखनीय है कि एक बार फिर जीनोम सीक्वेंसिंग के माध्यम से कोरोना से जुड़े चौंकाने वाले मामले सामने आए है। बड़ी बात यह है कि जीनोम सीक्वेंसिंग से पता चला है कि उदयपुर में अभी भी डेल्टा वैरिएंट लोगों के लिए खतरा बना हुआ है और लोगों की जान ले रहा है। जीनोम सीक्वेंसिंग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में कोरोना पॉजिटिव केसेज के परीक्षण में 88 नमूनों में से 87 डेल्टा वेरिएंट के मिले है। वहीं एक मामला कप्पा का था। रिपोर्ट 25 जून को जारी की गई है।

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जून में रिपोर्ट में सबसे ज्यादा डेल्टा के केसेज उदयपुर में मिले, मृत्युदर भी यहां ज्यादा
जून में जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में अभी भी सबसे अधिक खतरनाक डेल्टा कोरोना वैरिएंट का खतरा बना हुआ है। जीनोम सीक्वेंसिंग डेल्टा के 87 मामलों में सबसे ज्यादा केसेज उदयपुर में मिले है। उदयपुर में डेल्टा के 29 मामले दिखे है। वहीं जयपुर में 17, बीकानेर और जोधपुर में 15 और भरतपुर में 11 केसेज मिले हैं। बड़ी बात यह है कि जुलाई में जो मौते हुई है, उनमें 29 में से 13 मौतें उदयपुर में हुईं है, यानी कुल मौतों में से 44 प्रतिशत मृत्यु दर उदयपुर से ही है, जहां डेल्टा वैरिएंट के सबसे ज्यादा नमूने मिले है। साथ ही यहां अभी भी डेल्टा वैरिएंट का खतरा बना हुआ है।

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एसएमएस में शुरू हुई जीनोम सीक्वेंसिंग
प्रिंसिपल और कंट्रोलर डॉ सुधीर भंडारी ने कहा कि जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए अब हम प्रदेश में डेल्टा वैरिएंट और अन्य वैरिएंट के खतरे को भांपने में लगे है। सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में राज्य सरकार ने हाल ही में अपनी जीनोम सीक्वेसिंग लैब स्थापित की है, क्योंकि डेल्टा वैरिएंट ने दूसरी लहर में तबाही मचाई थी, लिहाजा इसे लेकर पूरी तरह सतर्कता बरती जा रही है। यही वजह है कि अब अधिकांश नमूनों का परीक्षण कर उनमें वैरिएंट का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

अप्रैल-मई में किया गया था 174 नमूनों का परीक्षण
मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिलों को निर्देश दिए गए है कि वो जीनोम सीक्वेंसिंग के नमूने भेजना जारी रखे, ,संदिग्ध केसेज को लैब परीक्षण के लिए भेजें, ताकि प्रदेश में कोरोना के वैरिएंटर की स्थिति का पता लगाया जा सके। उल्लेखनीय है कि राज्य को जून से पहले अप्रैल-मई में भी जीनोम सीक्वेसिंग की रिपोर्ट जारी की गई थी। इसमें 174 नमूनों में से 166 में डेल्टा वैरिएंट मिला था। जबकि पांच नमूने कप्पा वेरिएंट के थे। वहीं राज्य ने अब तक कप्पा संस्करण के 11 मामले और डेल्टा+ के एक मामले और अल्फा संस्करण के कुछ मामले दर्ज किए हैं।

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