झुंझुनूं, जाहिदा खान
देश में जहां कोरोना की दूसरी लहर ने गांवों को भी अपनी चपेट में लिया है। वहीं राजस्थान के झुंझुनूं का एक छोटा सा गांव ऐसा भी है, जहां ग्रामीणों ने जागरूकता, जिम्मेदारी और अनुशासन ने कोरोना की यहां एंट्री नही होने दी। हम बात कर रहे है, क्यामसर गांव की । ये गांव अपने आप में एक मिसाल हैं। ये झुंझुनूं ही नहीं पूरे राज्य के लिए एक नई पहचान है। गांव का हर नागरिक पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना कर्तव्य निभा रहा हैं। महिलाएं और बच्चे भी पूरा साथ दे रहे हैं।

​लगाए घर- घर के बाहर पोस्टर

गांव में जागरूकता इतनी है कोई व्यक्ति बिना मास्क के घर से नहीं निकलता है। हर घर के सामने पोस्टर लगे हैं। पोस्टर पर लिखा है बिना मास्क के घर नहीं निकले, नो मास्क नो एंट्री। हर घर के दरवाजें पर सेनेटाइजर रखा हुआ हैं। लोग अपने आप सरकारी गाइड लाइन की पालना कर रहे हैं। गांव में लॉक डाउन की पूरी पालना की जा रही है।

​बाहर से आने वाले व्यक्ति की सूचना तुरंत प्रशासन को

बताया जा रहा है कि यदि गांव में बाहर से आने वाले व्यक्ति की सूचना आती हैं, तो ग्रामीण खुद प्रशासन को इस संबंध में सूचना देते है। वहीं संबंधित व्यक्ति को आइसोलेट होने के लिए पाबंद करते है। गांव की चौपाल में कोई व्यक्ति एकत्रित नहीं होता हैं। जब से सरकार ने अनुशासन सप्ताह की घोषणा की है, बिना किसी प्रशासन या पुलिस के गांव के लोग अपने आप ही पालना कर रहे हैं। सुबह 11 बजे बाद गांव में कोई भी दुकान नहीं खुलती हैं। इसका नतीजा भी ये हुआ कि ये गांव कोरोना की दूसरी लहर से बचा हुआ हैं। लोगों की जागरुकता से गांव पूरी तरह से सुरक्षित हैं। गांव में कोई भी व्यक्ति पॉजिटिव नहीं हैं।

​झुंझुनूं में 67 प्रतिशत केस गांव में , लेकिन क्यामसर सुरक्षित

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उल्लेखनीय है कि झुंझुनूं के आंकडों के अनुसार 67 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में ही पॉजिटिव हैं। लेकिन फिर भी बड़ी बात यह है कि इसी जिले में आने वाला क्यामसर गांव पूरी तरह से सुरक्षित हैं। प्रशासन भी यहां लोगों की जागरूकता और समझदारी को देख उनके कायल हो गए है। गांव की खास बात यही है कि ग्रामीण सब कुछ अपने खुद के स्तर पर ही कर रहे हैं।

​गांवों में कोरोना की एंट्री की सूचना मिलते ही बनाई टीम

गांव में कोरोना की दूसरी लहर लोग बहुत डर गए। दूसरे गांव में लगातार मौतों का सिलसिला हो रहा है, पॉजिटिव की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में अपने गांव के लोगों को जागरुक करने के लिए पवन कुमार आलडिय़ा ने अपनी एक टीम बनाई। ये टीम पहले तो बहुत छोटी थी। इसके बाद गांव का हर नागरिक इस टीम में शामिल होता गया, महिलाएं भी जुडऩे लगी। ये कारवां बनता गया। नतीजा दूसरे गांवों कोरोना खूब फैला, जिले में एक एक गांव में एक दिन में ही 90 -90 लोग भी पॉजिटिव आए, लेकिन ये क्यामसर गांव ग्रामीणों की जागरुकता के कारण काफी सभी सैफ हैं। कोरोना के दो चार कैस छोड, एक भी पॉजिटिव नहीं आए।

ग्रामीणों ने सब अपने स्तर पर ही किया

क्यामसर गांव निवासी शिक्षक पवन कुमार आलडिय़ा ने बताया कि हमारी ओर से पहले युवाओं की एक टीम का गठन किया गया। हमने गांवों के लोगों को कोरोना माहमारी के खतरों से अवगत करवाया। पूरे गांव को साथ लिया। हर घर के सामने नो मास्क नो एंट्री के पोस्टर लगाकर लोगों को घरों में ही रहने का संदेश दिया। जो भी बिना मास्क मिलता , उनको निशुल्क मास्क देकर घर में रहने के लिए समझाया जाता । गांवों में लगातार सोडियम हाइपर क्लोराइड का छिडक़ाव किया जाता है। इसमें किसी सरकारी एजेंसी का कोई सहयोग नहीं लिया जा रहा हैं। ग्रामीण सब अपने स्तर पर ही कर रहे हैं।

​बच्चे भी अब लगा रहे है मास्क

सुनिल कुमार आलडिय़ा बताते है कि महामारी हमारे देश से चली नहीं जाती तब तक गांव में इसी प्रकार से जागरूकता अभियान जारी रहेगा। अगर गांव में किसी के भी कोई भी समस्या आती है तो उसके लिए उनकी पूरी टीम हमेशा मदद के लिए तैयार है। इसमें युवाओं का और गांववालों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। वह भी दिन रात अपने गांव को इस महामारी से बचाने के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। उनकी इस पहल से अब गांव में कोई भी बिना मास्क के नजर नहीं आता और कोई भी बेवजह घरों से बाहर नहीं निकलता। यहां तक की छोटे-छोटे बच्चे भी मास्क का प्रयोग करने लगे हैं।



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