हाइलाइट्स

  • हाडौती में आकाशीय बिजली का कहर जारी
  • कोटा में फिर गिरी बिजली एक बच्चे की मौत 3 जने घायल
  • इटावा उपखंड के रनोदिया गांव की घटना
  • बकरियां चराने गए थे आधा दर्जन बच्चे
  • तब ही हुई मूसलाधार बारिश में गिरी बिजली

कोटा, अर्जुन अरविंद
राजस्थान के हाड़ौती अंचल में यूं तो मानसून निष्क्रिय पड़ा हुआ है लेकिन छुटपुट स्थानों पर हो रही बारिश के दौरान आकाश से बिजली ने इलाके में कहर बरपा रखा है। संभाग के कोटा जिले के इटावा उपखंड क्षेत्र के रनोदिया गांव में शनिवार देर शाम आकाशीय बिजली ने कोहराम मचा दिया। देर शाम को बिजली गिरी और 8 साल के आकाश नामक बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई । इस हादसे में दो अन्य बच्चे और एक अधेड़ व्यक्ति झुलस जाने से घायल हो गए, जिन्हें ग्रामीणों ने इटावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती कराया है।

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घायलों को पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल
इधर, इस प्राकृतिक आपदा से उपखंड प्रशासन बेखबर रहा। घटनास्थल पर इटावा थाना पुलिस का जाब्ता पहुंचा। बालक आकाश, घायल हुए विक्रम उम्र 12 साल , संजय उम्र 13 साल व सीताराम उम्र 45 साल को अस्पताल पहुंचाया । चिकित्सकों ने अस्पताल पहुंचने पर आकाश को मृत घोषित कर दिया था , जबकि बिजली से झुलसे विक्रम, संजय व सीताराम को संभालते हुए उनका उपचार किया।

बकरियां चराने गए थे खेतों में
ग्रामीणों के मुताबिक हमेशा की तरह बालक बकरियां चराने गांव के खेतों की ओर गए हुए थे । देर शाम को वापिस घर लौटने के वक्त तेज बारिश हुई और इस दौरान आकाश से बिजली टूट पड़ी। मृतक बालक आकाश के पिता देशराज बैरवा ने बताया कि आकाश उसके बड़े भाई रामलखन के साथ खेत पर बकरियां चराने के बाद खेलने चला गया था और इस दौरान बारिश होने से आकाश व अन्य बच्चे खेत पर मेड पर बैठ गए। बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिर जाने से आकाश की अकाल मौत हो गई।

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ग्रामीणों ने लगाई पीड़ित परिवार के लिए सरकार से गुहार
इटावा थाना अधिकारी प्रकाश चंद शर्मा ने बताया कि मृतक आकाश बैरवा का शव मोर्चरी में रखवा दिया है । साथ ही मामले की जांच की जा रही है। इधर ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को सरकार से आर्थिक मदद दिलवाने की मांग की है।

क्यों गिरती है आकाशीय बिजली
बिजली चमकना एक प्राकृतिक क्रिया है। जब ज्‍यादा गर्मी और नमी मिलती है तो बिजली वाले खास तरह के बादल ‘थंडर क्‍लाउड’ बन जाते हैं और तूफान का रूप लेते हैं। सतह से करीब 8-10 किलोमीटर ऊंचे इन बादलों के निचले हिस्‍से में निगेटिव और ऊपरी हिस्‍से में पॉजिटिव चार्ज ज्‍यादा रहता है। दोनों के बीच अंतर कम होने पर तेजी से होने वाला डिस्‍चार्ज बिजली कड़कने के रूप में सामने आता है। बादलों के बीच बिजली कड़कना हमें नजर आता है और उससे नुकसान नहीं है। नुकसान तब होता है जब बादलों से बिजली जमीन में आती है। एक साथ भारी मात्रा में ऊर्जा धरती के एक छोटे से हिस्‍से पर गिरती है। एक बार बिजली गिरने से कई करोड़ वॉट ऊर्जा पैदा होती है। इससे आसपास के तापमान में 10,000 डिग्री से लेकर 30,000 डिग्री तक का इजाफा हो सकता है।

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