हाइलाइट्स

  • सोमवार तडके कोटा में हुई थी मूसलाधार बारिश
  • जेके लॉन अस्पताल के एनआईसीयू में पानी भरा
  • जेके लोन अस्पताल प्रशासन में मचा हडकंप
  • शिशुओं में संक्रमण का हुआ खतरा तो पानी निकालकर एनआईसीयू को करवाया सैनिटाइज

कोटा अर्जुन अरविंद
राजस्थान में मानसून की बारिश सरकार व सरकारी सिस्टम की कई व्यवस्थाओं की सच्चाई उजागर कर रही हैं। जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी कितनी ईमानदारी से निभाई हैं, वह मानसून की शुरुआती बारिश के दौरान सामने आ गया हैं। बड़ी बात यह है कि कोटा शहर में राज्य सरकार ने 3.24 करोड पर खर्च करके प्रदेश का पहला मॉडयूलर नियोनेटल इंसेंटिव केयर यूनिट एनआईसीयू बनाया था, यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने इसके निर्माण के समय मॉनिटरिंग की थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसका वर्चुवल शुभारंभ किया था। प्रदेश सरकार ने इस मॉडयूलर एनआईसीयू की खूब वाही-वाही लूटी, लेकिन सोमवार को कोटा शहर में तडके हुई 40.4 एमएम बारिश ने राजस्थान के इस पहले मॉडयूलर एनआईसीयू को पानी-पानी कर दिया।

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जे .के. अस्पताल रह चुका है शिशुओं की मौत से सुर्खियों में
बारिश का पानी एनआईसीयू के फर्श में जमा हो गया। इससे नवजात शिशुओं में संक्रमण का खतरा पैदा हुआ। परिजन नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हो गए। क्योंकि जगजाहिर है कि कोटा जेके लोन अस्पताल वहीं अस्पताल हैं, जो नवजात शिशुओं की मौत के आंकडे से सुर्खियों में पिछले सालों रहा था। ऐसे में लाजमी था कि जैसे ही जेके अस्पताल प्रशासन को एनआईसीयू में बारिश का पानी आने की खबर मिली है, तो हड़कंप मच गया। इधर बारिश से पानी -पानी हुए एनआईसीयू में परिजन बेबस नजर आए, उन्हें भी अपने नवजात बच्चों में संक्रमण के खतरे की चिंता दिखाई देने लगी। पता चला कि यूडीएच मंत्री सोमवार को कोटा प्रवास पर थे। ऐसे में तत्काल जेके लोन अस्पताल प्रशासन का अमला बारिश के पानी को समेटकर निकालने में जुट गया। बारिश के जमा पानी को निकाला गया। संक्रमण फैलने की स्थिति पैदा ना हो, ऐसे में पानी को साफ करवाने के बाद पूरे मॉड्यूलर एनआईसीयू कैंपस को सैनिटाइज करवाया गया।

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दावा यह है कि राजस्थान में इस तरह का स्ट्रक्चर किसी सरकारी अस्पताल में नहीं
उल्लेखनीय है यह मॉडयूलर एनआईसीयू 45 बैड का हैं, जिसे राजस्थान सरकार ने लगातार जेके लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत होने, राजनीति मुद्दा बन जाने के बाद न्यू बोर्न बेबी के बेहतर व आधुनिक सुविधाओं के साथ उपचार करने को लेकर बनाया था। ऐसा दावा है कि राजस्थान में इस तरह का स्ट्रक्चर किसी सरकारी अस्पताल में नहीं हैं। इधर, अस्पताल अधीक्षक डॉ. एच.एल. मीणा से पूरे मामले में एनबीटी ने उनका पक्ष जाना। डॉ. मीणा ने कहा यह मॉडयूलर एनआईसीयू नया बना हैं। ऐसे उसके ज्वाइंट और निर्माण के दौरान कुछ ड्रेनेज पाइप ब्लॉक होने से इस तरह की समस्या पैदा हुई हैं, जो कुछ देर के लिए रही। जैसे ही पानी एनआईसीयू में पहुंचा, तो तत्काल उससे साफ करवाया गया, ड्रेनेज सिस्टम को दुरूस्त किया गया। संबंधित ठेकेदार और सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को मौके पर बुलाकर समस्या की जड और उसके समाधान को तलाशा गया। ताकि भविष्य में बारिश के दौरान इस तरह की समस्या ना हो।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र लिखेंगे अस्पताल अधीक्षक
खैर इस समस्या व अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन हैं, जिसने नवजात शिशुओं के परिजनों में उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढाई, इन सवाल के जवाब में अस्पताल अधीक्षक डॉ. एलएच मीणा ने कहा वह इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को लिखेंगे, उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा, ताकि नवजात शिशुओं की जीवन पर आगे कोई खतरा ना बने।

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