हाइलाइट्स

  • कोटा जिले के मोडक स्टेशन कस्बा निवासी 26 साल के आसिफ की 20 अप्रैल को हुई मौत
  • आक्सीजन की कमी के चलते हुई दर्दनाक मौत
  • 40 मिनट तक नहीं मिला ऑक्सीजन तडप-तडप के हुई थी मौत
  • आसिफ की मौत से परिवार तबाह, बचे है बूढे पिता, बेटियां है सुसराल,
  • पिता को बीच-बीच में आती है संभालने, अकेली बहू मायके में, मां दस साल पहले गुजर चुकी

कोटा, अर्जुन अरविंद
देश में जहां कोरोना की तीसरी लहर की आहटें तेजी से बढ़ रही है। वहीं दूसरी लहर को लेकर केंद्र सरकार दावे कर रही हैं कि दूसरी लहर के वक्त एक भी मौत ऑक्सिजन की कमी के चलते नहीं हुई हैं। लेकिन एनबीटी इन दावों की परतें उखडाने वाला सच बता रहा हैं। सरकार अगर सच सुन सकती है, तो अपनों को खोने वालों की जुबानी सुने। कोटा का एक परिवार आक्सिजन की कमी के चलते पूरी तरह से तबाह हो गया। यह दर्दभरी कहानी हैं, कोटा जिले के मोडक स्टेशन कस्बे के कोरोना ग्रस्त होकर ऑक्सिजन की कमी के जान गवाने वाले 26 साल के आसिफ की।

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छह महीने में सब कुछ खोया एक विवाहिता ने
8 नवंबर 2020 को चितौडगढ जिले के भैंसरोडगढ निवासी सोलिया से आसिफ का निकाह हुआ था। परिवार में तब खुशियों की बहार थी, लेकिन 19 व 20 अप्रैल की काली रात आसिफ की पत्नी सोलिया की जिंदगी में घनघोर अंधेरा लेकर आई, उसका सुहाग ही उजड गया, लेकिन आसिफ की मौत कैसे हुई, यह जानना जरूरी है। दरअसल सोलिया के पति आसिफ की मौत कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान 40 मिनट तक पति आक्सिजन नहीं मिलने से हुई। आसिफ कोरोना से ग्रसित था। सोलिया की आंखों के सामने पति तडपता रहा और 6 माह जिंदगी भर का साथ निभाने का वादा करने वाला आसिफ उसे अकेला छोड कर चला गया। सोलिया की आंखों में आज भी आंसू नहीं सूखते।

पिता को अकेल छोड़ गया आसिफ
वहीं आसिफ के पिता एहसान हुसैन परिवार में अकेले रहे गए। बहू आसिफ की मौत के बाद मायके में हैं। आसिफ की मां रूखसाना की दस साल पहले मौत हो चुकी। आासिफ के दो बहने है, एक शहनाज व दूसरी साइना। दोनों अपने सुसराल में रहती हैं। अकेले रहे पिता एहसान हुसैन की सारसंभाल ने बीच-बीच में घर आती हैं। आसिफ ग्रेजुएट था वह ई-मित्र चलाता था।

आसिफ की दादी – चाचा भी हुए दुनिया से रुखसत
बहन के दामाद फरीद एनबीटी के बताते है कि आसिफ की मौत के पहले उसकी दादी पोते के बीमार होने के गम में 13 अप्रेल को रुखसत हो गई थी। वहीं 20 अप्रेल को आसिफ की मौत के बाद 22 अप्रेल को उसके चाचा जाकिर की मौत हो गई। ऐसे में एहसान हुसैन को छोटे भाई जाकिर का बेटा आदिल संभालता हैं। जाकिर ने आसिफ की हॉस्पिटल में भी देखरेख की थी। परिवार वालों से मिली जानकारी के बाद यह समझा जा सकता है कि ऑक्सिजन की कमी और दूसरी लहर के कैसे एक संयुक्त परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस परिवार से ज्यादा सच्चाई सरकार को कोई नहीं बता सकता।

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यह सुने सरकार कितना मुश्किल वक्त था ऑक्सिजन खत्म होने के दौरान
आसिफ के बहन के दामाद फरीद एनबीटी को बताता है कि आसिफ को सबसे पहले रामगंजमंडी डॉक्टर को दिखाया था। मामूली बीमार हुआ था। तब कोरोना की दूसरी लहर भी नहीं थी। बाद में उसके कफ में ब्लड आने की शिकायत हुई। डॉक्टर ने निमोनिया की शिकायत बताई। डॉक्टर की सलाह पर उसे कोटा मेडिकल कॉलेज में 4 अप्रैल को भर्ती करवाया। पहले जनरल वार्ड में और फिर आईसीयू में वो भर्ती रहा। 19 अप्रेल की रात को उसकी अचानक ऑक्सिजन का लेवल डाउन होने लगा। आसिफ की सांसें उखलने लगी। फरीद व आसिफ की पत्नी सोलिया दोनों आसिफ के पास थे, दोनों उसकी हालत को देखकर घबरा गए। स्टाफ से डयूटी डॉक्टरों को सूचित किया पता लगा ऑक्सिजन खत्म हो गई। आसिफ को कई बार दौरे पडे और करीब 40 मिनट के संघर्ष के बाद आसिफ ने अंतिम सांस ली।

परिजनों का सरकार से आग्रह, अस्पतालों में रखे पर्याप्त ऑक्सिजन
आसिफ के परिजनों का कहना है कि उस वक्त हमारे हाथ में पछतावे और हताश के अलावा कुछ नहीं था, क्योंकि आसिफ हमें ऑक्सिजन नहीं मिलने के कारण छोडकर चला गया था। आसिफ के बहन के दामाद फरीद ने कहा सरकारें अब तीसरी लहर में अस्पतालों में ऑक्सिजन की पर्याप्त उपलब्धता रखें, ताकि कोई अपनों को ना खोए। सरकार समझें क्योंकि वह रात हमें जिंदगी भर का दर्द दे गई।

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