हाइलाइट्स

  • कस्बों व गांवों घोषित से अघोषित बिजली कटौती,
  • उद्योग धंधे सहित कारोबार होने लगा है प्रभावित
  • नगर पालिका क्षेत्रों में घोषित 1 घंटा गांवों में 4 घंटे की हो रही है बिजली कटौती
  • गांवों में अघोषित रूप से 8 घंटे तक की जा रही है कटौती

कोटा, अर्जुन अरविंद
कोयले की भारी कमी के चलते पूरे देश में बिजली संकट छाया हुआ हैं। बिजली उत्पादित करने वाले थर्मल प्लांटों को कोयले की पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में त्योहारी सीजन व खरीफ फसल तैयारी सीजन के शुरू होने से डिमांड के मुताबिक उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल पा रही हैं। उद्योग धंधे व कारोबार बुरी तरह से प्रभावित होने लगा हैं। नियमों में मुताबिक एक थर्मल प्लांट को कम से कम 15 दिन का कोयले का स्टॉक की जरूरत होती है, लेकिन प्लांटों के पास सिर्फ 3 से 4 दिन का कोयले का स्टॉक हैं। राजस्थान का हाडौती संभाग जहां प्रदेश के तीन बडे प्लांट कोटा थर्मल, झालावाड का कालीसिंध थर्मल व बारां जिले का छबडा मोतीपुरा थर्मल प्लांट बिजली का उत्पादन करते हैं। लेकिन इन दिनों कोयले की भारी कमी और मेटिनेंस के नाम पर इन प्लांट में क्षमता के अनुसार बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा हैं।

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सिर्फ 2620 मेगावाट ही बिजली उत्पादन
कोटा संभाग के इन प्लांटों की 4880 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने की क्षमता हैं। लेकिन आज ताजा रिपोर्ट के मुताबिक उक्त प्लांटों में सिर्फ 2620 मेगावाट ही बिजली का उत्पादन हो रहा हैं। कोयले की स्थिति देखते हुए इन प्लांटों की स्थिति क्रिटिकल बनी हुई हैं। प्लांटों को चलाने के लिए स्टॉक में सिर्फ 3 से 4 दिन का ही कोयला हैं । इधर, कोयला पर्याप्त नहीं मिलने यूनिटें पूरी क्षमता पर नहीं चल पा रही हैं, दूसरा मेटिनेंस के नाम पर यूनिटें ठप्प पडी हैं।

ऐसे में राज्य सरकार ने बिजली संकट से निपटने के लिए प्रदेश के कस्बों जो नगर पालिका क्षेत्र का हिस्सा है। यहां पर 1 घंटे की और गांवों में 4 घंटे की घोषित बिजली कटौती की जा रही हैं। जबकि ग्रामिण इलाकों में बिजली का संकट सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा हैं। गांवों में तो बिजली 8-8 घंटे काटी जा रही हैं। गांवों में बिजली संकट छाने से धरने प्रदर्शन सरकार के खिलाफ होने शुरू हो गए हैं। बीजेपी इस मुद्दे पर सरकारों को चौतरफा घेरने की तैयारी में जुटी हुई हैं।

हाडौती के प्लांटों की ताजा रिपोर्ट
कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन की आज की रिपोर्ट देते हुए चीफ इंजीनियर वीके गोलानी ने कहा कि प्लांट में सात यूनिट से बिजली का उत्पादन होता हैं। 1 व 2 नंबर की यूनिट 110, 3,4,5 नंबर की यूनिट 210 और 6 व 7 नंबर की यूनिट 195 मेगावाट क्षमता की यूनिट की हैं। बिजली उत्पादन की क्षमता 1240 मेगावाट की हैं। 6 नंबर की यूनिट को छोडकर सभी यूनिटों से आज 1040 मेगावाट बिजली उत्पादित की जा रही हैं। 4 रैक कोयला रोजाना मिल रहा हैं, 3 से 4 दिन का कोयला स्टॉक में पडा हैं। साढे चार रैक की खपत रोजाना हो रही हैं। वार्षिक शटडाउन पर चल रही 6 नंबर की यूनिट 10 अक्टूबर को चालू होगी। 15 दिन का कोयला स्टॉक नहीं होने से यह प्लांट क्रिटिकल स्थिति में हैं।

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बारां में 230 मेगावॉट ही उत्पादन
इधर, बारां जिले में छबडा मोतीपुरा थर्मल प्लांट की स्थिति भी क्रिटिकल हैं। क्रिटिकल प्लांट 1000 मेगावाट की क्षमता का हैं। 250-250 मेगावाट की क्षमता की 4 यूनिट इस प्लांट में हैं। इनमें से सिर्फ एक नंबर की ही यूनिट से लगभग 230 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा हैं। 3 से 4 दिन का कोयला यहां स्टॉक में हैं। चीफ इंजीनियर सुदर्शन सचदेवा के मुताबिक बाकी 2 नंबर की यूनिट एक सप्ताह चालू होगी। 3 नंबर की यूनिट प्लाईएश के जमे होने के कारण बंद कर रखी हैं, 15 नंबर तक यह यूनिट चालू की जाएगी। जबकि पिछले माह 4 नंबर यूनिट में फलाई एश का हॉपर टूट जाने से बंद पडी हैं। यह यूनिट संभवत 6 माह तक चालू नहीं होगी।

छबडा में 450 मेगावॉट
वहीं छबडा मोतीपुरा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट के बारे में कार्यवाहक चीफ इंजीनियर सुदर्शन सचदेवा ने कहा कि प्लांट में 660-660 मेगावाट की क्षमता की दो यूनिट हैं। एक यूनिट से बिजली का उत्पादन की जा रहा है, दूसरी यूनिट मेटिनेंस पर्पज से बंद पडी हैं। जिसके अक्टूबर अंत तक चालू होने की संभावना हैं। फिलहाल सुपर क्रिटिकल प्लांट की एक यूनिट से 450 मेगावाट की बिजली उत्पादित हो रही हैं। यहां भी कोयला स्टॉक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यूनिट पूरी क्षमता पर नहीं चल पा रही हैं।

झालावाड जिले का कालीसिंध थर्मल पावर प्लांट भी कोयले की कमी से जूझ रहा हैं। चीफ इंजीनियर केएल मीणा ने कहा कि 4 रैक कोयला रोजाना मिल रहा हैं। 10 हजार टन कोयला ही स्टॉक में हैं। रोजाना जो कोयला मिला रहा है। उसी इसे प्लांट रन कर रहा हैं। यहां 660-660 मेगावाट की दो यूनिटें हैं। दोनों यूनिटें आज की रिपोर्ट के मुताबिक बिजली का उत्पादन कर रही हैं। लेकिन बिजली का उत्पादन 1320 मेगावाट की एवज में सिर्फ 900 मेगावाट की उत्पादित हो रही हैं। यहां भी कोयले की जरूरत प्लांट को यूनिटों को पूरी क्षमता से चलाने की हैं।

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थर्मल कर्मचारी नेताओं का यह है कहना
राजस्थान विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ कोटा ईकाई के अध्यक्ष रामसिंह शेखावत ने कहना है कि देश- प्रदेश में बिजली संकट से जहां व्यापार पर सीधा असर होगा। वहीं किसानों की परेशानियां भी बढ़ेगी। शेखावत के अनुसार हाडौती के तीनों पावर प्लांट कोयला पर्याप्त नहीं मिलने के कारण क्षमता के मुताबिक बिजली का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। एक ओर जहां राजस्थान सरकार की ओर से भुगतान नहीं करने से कोयला पर्याप्त नहीं मिल रहा हैं। वहीं देश में कोयला सप्लाई ने मुसीबत बढ़ा दी है।

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