हाइलाइट्स:

  • क्या जोधपुर में ज्यादा मौत के आंकड़े के पीछे एमडीएम इंजेक्शन ब्लैक मार्केटिंग का खेल है ?
  • सीएम साहब क्या हो रहा है आपके जोधपुर शहर में ?
  • क्या जोधपुर में ज्यादा मौत के आंकड़े के पीछे एमडीएम इंजेक्शन ब्लैक मार्केटिंग का खेल है ?
  • नर्सिंंगकर्मियों की खुली पोल तो अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू।
  • क्यों नहीं सौपी जा रही एसओजी को जांच।
  • आरोपी नर्सिंगकर्मी हो या डॉक्टर उनको अंजाम तक पहुंचाए सरकार।

जोधपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर जोधपुर के सबसे बड़े अस्पताल में कोरोना काल में वह घोटाला हुआ है, जिसने पूरे चिकित्सा विभाग को शर्मसार कर दिया है। यहां के नर्सिंग कर्मचारियों ने धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सा के पेशे को शर्मसार कर रख दिया। मथुरादास माथुर अस्पताल अधीक्षक एमके आसेरी के आदेश पर गठीत जांच कमेटी भी इस मामले को रफादफा करती नजर आ रही हैं। वहीं दूसरी ओर नर्सिंग कर्मचारी अब इस मामले में कुछ डॉक्टर्स को भी घसीट रहे हैं। नर्सिंगकर्मियों की ओर से इस घोटाले में डॉक्टर्स का नाम घसीटे जाने के बाद यह तय हो चुका है कि इस अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन का बड़ा घोटाला हुआ है। और वो भी उस समय जब संभाग की जनता इन इंजेक्शन के अभाव में दम तोड़ रही थी।

यूं हुआ रेमडेसिविर इंजेक्शन घोटाला
जब कोरोना की दूसरी लहर पीक पर थी और रेमडेसिविर इंजेक्शन की भयंकर कमी चल रही थी तो इस दौरान संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों के इलाज के साथ-साथ कुछ लालची लोग सक्रिय हो गए। उन्होंने इंसानियत और चिकित्सा पेशे को शर्मसार करने वाले घोटाले को अंजाम दे दिया। दरअसल इस अस्पताल में फर्जी मरीजों की भर्ती इंद्राज कर रेमडेसिविर इंजेक्शन उठा लिए गए और उन्हें बाजार में ऊंचे दामों में बेच दिया गया। जबकी मरीज अस्पताल में भर्ती हुए ही नहीं थे।

गौरतलब है कि इसी दौरान एक युवक की एमडीएम अस्पताल के टेबल पर ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी के कारण तड़फ-तड़फ कर मौत हो जाने का विडियों भी सामने आया था।
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जांच कमेटी की रिपोर्ट में इनको लिया संदेह के घेरे
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में नर्सिंग कर्मचारी भरत विश्नोई, पृथ्वीसिंह, दिलीप शर्मा, गौरी बंजारा, सुमन ढाका, कुलदीप, मीरा, संगीता, नरेश, अरूण, निर्मला, सीता, मूलकांता, सहित रेणु पंवार पर शक जाहिर किया गया है। इसके अलावा प्रेमसिंह, सरोज चौधरी और चैनाराम पर शक जताते हुए, इस मामले की जांच पुलिस से करवाने की अनुशंसा की है। लेकिन फिलहाल अस्पताल प्रशासन इस मामले को रफा-दफा करने के प्रयास में जुटा दिखाई दे रहा है। जबकि नर्सिंगकर्मियों ने डॉक्टर्स पर आरोप लगाने के बाद यह साबित हो जाता है कि अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की धांधली हुई है और आशंका से कहीं अधिक इंजेक्शन की काला बाजारी का खेल-खेल कर सेवा के कार्य में जुटे दरिंदो ने मोटी कमाई की है।
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नर्सिंगकर्मियों ने इन डॉक्टर्स पर लगाए आरोप
इस मामले में नर्सिंगकर्मियों का नाम सामने आने के बाद अब आरोप प्रत्यारोप का खेल शुरू हो चुका है। नर्सिंगकर्मी अब बिना झिझक डॉक्टर्स पर रेमडेसिविर इंजेक्शन डमी मरीज की भर्ती बताकर ले जाने का आरोप लगा रहे है। इसमें डॉ. बीएस जोधा, डॉ. जेपी सोनी का नाम खुलकर सामने आया है। जबकि डॉक्टर्स ने इन आरोपों को झूठा बताया है और कमेटी की जांच रिपोर्ट में उनके नाम का खुलासा नहीं हुआ है।

एसओजी को जांच सौपने की मांग
भारतीय जनता पार्टी के नेता राजेन्द्र बोराणा ने यह आरोप लगाया है कि एमडीएम अस्पताल में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सर्वाधिक मौत होने के पीछे असल में इस घिनौने खेल का हाथ है। उनका कहना है कि जब मरीजों को इंजेक्शन की जरूरत थी और वे मौत के मुंह में जा रहे थे तो ऐसे समय में इंजेक्शन घोटाले में यहां के कर्मचारी लगे हुए थे। ऐसे में मरीजों की इंजेक्शन की कमी के चलते मौत हो गई। उन्होंने सरकार से इस मामले की जांच एसओजी को सौपने की मांग की है। (रिपोर्ट-ललिता व्यास)

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