हाइलाइट्स

  • प्रतापगढ़ के दाता गांव में हुई ग्रामीणों की बैठक
  • खनन हुआ तो होगा वातावरण खराब
  • पहले भी जता चुके हैं विरोध
  • विरोध का वीडियो हो रहा वायरल

प्रतापगढ़
प्रदेश में माइंस घोटाले में प्रतापगढ़ का नाम आने के साथ ही जिले के पीपलखूंट क्षेत्र के ग्रामीण अब सरकार के खिलाफ लामबंद हो गए है। खनन घोटाले के खुलासे के बाद से ही सोशल मीडिया पर माइनिंग अधिकारी और क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो 6 नवम्ंबर 2020 का बताया जा रहा है। इसमें माइंस के अधिकारियों को क्षेत्र में बिना ग्राम सभा और पंचायत की अनुमति के प्रवेश नहीं करने को लेकर चेतावनी दी जा रही है। अब यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आने के बाद पीपलखूंट क्षेत्र के ग्रामीणों ने फिर आंदोलन की तैयारियां कर ली है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने बैठक कर क्षेत्र के जंगल और जमीन को बचाने को लेकर तैयारी शुरू कर दी है।

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लाइमस्टोन की कैटेगरी मार्बल में तब्दील करने से केंद्र को नुकसान
ग्रामीणों ने अपने को जमीन का मूल मालिक बताते हुए आत्मदाह करने तक की चेतावनी दी है। खान विभाग ने प्रतापगढ़ के पीपलखूंट तहसील के दांता में 74.249 हेक्टेयर और केला-मेला में 10.4162 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लाइमस्टोन यानी सीमेंट की श्रेणी बदलकर मार्बल कर दी। लाइमस्टोन की माइंस को मार्बल श्रेणी में बदलकर आरडीएसए माइनिंग को आवंटित कर देने से केंद्र सरकार को करीब एक हजार करोड़ रुपए के राजस्व के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर किए विरोध के स्वर बुलंद
उल्लेखनीय है कि लाइम स्टोन मेजर मिनरल में आता है, जिसकी नीलामी केंद्र के नियमों के अनुसार करने का प्रावधान है, जबकि मार्बल माइनर मिनरल में आता है। इसकी राज्य सरकार के नियमों से नीलामी की जाती है। श्रेणी बदलकर विभाग ने मार्बल के लिए दोनों ब्लॉक आरडीएसए माइनिंग को आवंटित कर दिए। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में राजनैतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर जमकर सरकार को घेरा जा रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने स्तर पंचायत बुलाकर इसके विरोध के स्वर बुलंद करने की भी तैयारी कर ली है।

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जमीन का अधिकार हमारा
सरकार के पीपलखूंट उपखंड क्षेत्र में माइनिंग की अनुमति देने को लेकर ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि सरकार से भी सीधी लडाई के मूड में नजर आ रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि वह सदियों से यहां रहते आ रहे है और प्रकृति उनकी मां है। सरकार कितना भी दम लगा ले, जमीन का अधिकार उनका है इसके लिए वह मरने को भी तैयार है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां अगर खनन होता है तो क्षेत्र का वातावरण भी खराब हो जाएगा।

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