हाइलाइट्स:

  • राजस्थान उपचुनाव की सहाड़ा सीट पर बीजेपी को मिली करारी हार
  • ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रचार भी नहीं आया काम
  • वसुंधरा राजे की दूरी को माना जा रहा है बड़ा फैक्टर

जयपुर
प्रदेश में हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजों बेहद रोचक रहे। जहां इन नतीजों ने कांग्रेस को नई मजबूती दी है। वहीं बीजेपी के लिए उपचुनाव का परिणाम फिर मंथन करने वाले बना हैं। जानकारों की मानें, तो वसुंधरा राजे की चुनाव से दूरी भी एक बड़ी वजह है , जिसके चलते बीजेपी इतना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई। हालांकि बीजेपी की ओर से राजे की कमी को दूर करने के लिए बीते साल बीजेपी में शामिल हुए ज्योतिरादित्य को गंगापुर सहाड़ा सीट पर प्रचार के लिए उतारा था। लेकिन उसका भी फायदा नहीं मिला। सहाड़ा में भाजपा की सबसे बड़ी हार हुई है। आंकड़ों के मुताबिक यहां 2018 के चुनाव में भाजपा केवल 7280 वोटों से हारी थी। इस बार हार का मार्जिन बढ़कर 42 हजार का हो गया। भाजपा का वोट प्रतिशत भी सहाड़ा में 5 फीसदी घट गया।

राजस्थान उपचुनाव 2021 : परिवारवाद रहा हावी , बीजेपी- कांग्रेस के सिंपैथीकार्ड से प्रत्याशियों को मिली सत्ता की चाबी

पुराने संबंध को नहीं भुना पाए
जानकारों की मानें, तो बीजेपी की ओर से ज्योतिरादित्य को गंगापुर सहाड़ा सीट पर चुनाव प्रचार के लिए बुलाने के पीछे बड़ी रणनीति बताई जा रही थी। वजह यह थी कि सहाड़ा गंगापुर क्षेत्र से ग्वालियर रियासत का पुराना संबंध है। लिहाजा ज्योतिरादित्य की गंगापुर में सभा करवाई, लेकिन गंगापुर क्षेत्र का सिंधिया घराने से तीन दशक पुराना रिश्ता काम नहीं आया। ज्योतिरादित्य ने यहां सभा को संबोधित करते हुए भी गंगापुर के लोगों को उनसे उनका नाता भी बताया था लेकिन ये कार्ड गंगापुर की जनता के सामने नहीं चल सका।

उपचुनाव पर बाद में दिया गया ध्यान
जानकारों का कहना है कि क्योंकि राजस्थान के उपचुनाव से पहले बंगाल चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज थी। लिहाजा बीजेपी का फोकस उपचुनाव से ज्यादा बंगाल का गढ़ जीतने में रहा। यही वजह रही कि प्रदेश बीजेपी के कई नेताओं की फौज भी बंगाल चुनाव में लगाई गई। चुनाव के आखिरी चरणों में ही पार्टी ने ज्योतिरादित्य को प्रचार के लिए बुलाना तय किया। लिहाजा आनन- फानन में हुई इस रैली का फायदा पार्टी को नहीं मिल सका।

सहाड़ा से गायत्री देवी की रिकॉर्ड जीत, 10 पॉइन्ट्स में पढ़ें- कैसे डैमेज कंट्रोल कर BJP के डॉक्टर रतनलाल को दी शिकस्त

पितलिया की नाराजगी
सहाड़ा सीट पर इतनी बुरी शिकस्त का एक बड़ा फैक्टर यह भी माना जा रहा है कि पार्टी ने लादूलाल पितलिया भी दरकिनार रखा। लिहाजा पितलिया ने जब निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया, तब भी पार्टी के साथ उनकी अनबन दिखी। पितलिया अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। वहीं उनके ऑडियो वायरल घटनाक्रम का असर भी चुनाव में देखने को मिला। जानकारों की मानें, तो पितलिया एपिसोड का असर भी सहाड़ा उपचुनाव में देखने को मिला।

बीजेपी के लिए खास नहीं रहे उपचुनाव
इन सभी के बीच एक फैक्टर यह भी है कि बीजेपी के लिए उपचुनाव प्रदेश में खास नहीं रहे हैं। जानकारी के अनुसार वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री रहते हुए 2014 से लेकर 2018 के बीच में छह विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उनमें से केवल कोटा उत्तर और धौलपुर को छोड़ सभी उपचुनावों में भाजपा सत्ता से दूर ही रही। कांग्रेस ने 2014 में हुए उपुचनाव में सूरजगढ़, वैर, नसीराबाद सीट जीती थी। वहीं बीजेपी केवल कोटा उत्तर सीट जीती थी। इसके बाद धौलपुर उपचुनाव में भी बीजेपी को जीत मिली। इसमें महत्वपूर्ण यह है कि क्योंकि धौलपुर वसुंधरा राजे का गढ़ है, लिहाजा धौलपुर ने पिछले उपचुनाव में इसे पूरी ताकत के साथ जीता। इधर वर्ष 2018 की शुरुआत में अजमेर, अलवर लोकसभा सीट और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव हुए। यहां भी बीजेपी को करारी हार मिली।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *