हाइलाइट्स:

  • सुप्रीम कोर्ट ने दिया अभिभावकों को झटका
  • निजी स्कूल पिछले सत्र की 85 प्रतिशत
  • इस सत्र की पूरी फीस ले सकेंगे
  • राजस्थान हाईकोर्ट का 70 फीसदी स्कूल फीस का आदेश रद्द
  • पैरेंट्स बोले- पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे

जयपुर
कोरोना के संकट के बीच लंबे समय से चला आ रहे फीस विवाद मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जहां अभिभावकों को थोड़ी राहत मिली है। वहीं स्कूल प्रबंधन को भी इस फैसले में संतोष मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोरोनाकाल के शैक्षणिक सत्र 2020-2021 के लिए निजी स्कूलों को सालाना फीस में 15 फीसदी की छूट देने के लिए कहा है, यानी पैरेंट्स को अब 85 प्रतिशत फीस देनी होगी। वहीं, कोर्ट ने यह भी कहा है कि स्कूल संचालक शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए पूरी फीस वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के आने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट का हाल ही दिया, वो आदेश रद्द हो गया है, जिसमें निजी स्कूल से ट्यूशन फीस 70 प्रतिशत लेने के लिए कहा था। कोर्ट ने पैरेंट्स की तरफ से लगाई गई इस मामले की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है।

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अभिभावक- स्कूल दोनों ने सिफारिशों को मानने से किया था इनकार
बता दें कि राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से जारी आदेश की सिफारिशों को निजी स्कूल और अभिभावकों ने मानने से इनकार कर दिया था। अभिभावकों ने स्कूलों की 70 प्रतिशत फीस को ज्यादा बताया था, जबकि निजी स्कूलों ने अभिभावकों से पूरी फीस लेने की मांग की थी। लिहाजा मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी। इस मामले में सोमवार को निजी स्कूलों की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान, प्रतीक कांसलीवाल, और अनुरूप सिंघी , वहीं राज्य सरकार की ओर से एएजी मनीष सिंघवी और अभिभावकों की ओर से एडवोकेट सुनील समदड़िया ने पैरवी की थी।

जानिए क्या कहा – सुप्रीम कोर्ट ने
उल्लेखनीय है कि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जहां फीस मामले में अपनी पूरी राय रखी है। वहीं ऑनलाइन क्लासेज को लेकर भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट के मुताबिक यह फीस बच्चों को समान 6 किस्तों में 8 फरवरी से 5 अगस्त के बीच तक देनी होगी। वहीं कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी बच्चे की फीस जमा ना होने पर उसका नाम स्कूल उसका नाम नहीं काट सकेगा। और ना ही ऑनलाइन और फिजिकल क्लासेज रोकी जाएगी। ना ही परिणाम रोका जाएगा।

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अभिभावक नाखुश, बोले- पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे
इधर इस फैसले से अभिभावक नाखुश है। इस मामले में संयुक्त अभिभाव संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू का कहना है कि हम पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे । क्योंकि बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी है, जिन्होंने एक भी ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाएं नहीं ली। ऐसे में यह स्टूडेंट्स फीस क्यों चुकाएं।

फीस तय करने पर भी लिया फैसला
कोर्ट ने जहां फीस वसूलने के प्रतिशत पर अपनी बात रखी। वहीं निजी स्कूलों की ओर से दिए गए तर्क , फीस तय करना कमेटी का हक, न कि राज्य सरकार का। इस पर भी अपनी बात रखी। कोर्ट ने स्कूल फीस एक्ट 2016, रूल्स 2017 को वैध करार दिया। वहीं कोर्ट ने कहा कि स्कूल कमेटी में वहीं अभिभावक होंगे, जिन्हें फीस एक्ट और अकाउंट की समझ हो। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह डिविजनल फीस रेग्यूलेटरी कमेटी जा सकता है। इसके बाद कमेटी जो फैसला लेगी, उसे दोनों पक्षों को मानना होगा।

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