राहुल कुमार ठाकुर, अररिया
बिहार के अररिया में 10 साल की मासूम से हैवानियत के बाद उसकी हत्या के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को फांसी का सजा सुनाई है। ये सनसनीखेज मामला दो साल पहले अगस्त 2019 का है। जब बच्ची मेला देखने के लिए गई थी। इसी दौरान अचानक लापता हो गई। परिजनों ने बच्ची के गायब होने की शिकायत थाने में दर्ज कराई। इस बीच कोसी प्रोजेक्ट नहर के पास सड़क किनारे पीड़िता का अर्ध नग्न शव मिला था। जांच में मौके से मिली चप्पल से सलाखों के पीछे पहुंचा गुनहगार। अब अररिया की पॉक्सो कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई है।

जानिए कैसे हुआ था ये सनसनीखेज घटनाक्रम
कोर्ट का यह फैसला सिमराहा (फारबिसगंज) थाना केस संख्या-758/2019 से संबंधित है। जिसे मृतका की नानी ने दर्ज कराया था। इसमें उन्होंने पुलिस को बताया था कि विषहरी स्थान में वो अपनी नातिन को लेकर मेला घूमने के लिए गई थी। भारी भीड़ में अचानक ही उनकी नातिन कहीं गायब हो गई थी। बाद में बच्ची का शव मिलने की जानकारी उनके एक रिश्तेदार से प्राप्त हुई थी। इस सूचना के बाद परिजन और पुलिस जब मौके पर पहुंचे तो बच्ची का खून से लथपथ शव मिला था।

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पुलिस को मौके से मिली एक चप्पल से आरोपी का चला पता
पुलिस ने तुरंत ही शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। साथ ही मामले की जांच में डॉग स्कॉयड का सहारा लिया गया। मौका-ए-वारदात पर आरोपी की छूटी हुई चप्पल से उसकी पहचान हुई। इसके बाद डॉग स्कॉयड की मदद से ही पुलिस आरोपी के घर पर पहुंची। इस बीच आरोपी अमर कुमार बाहर से घर के दरवाजे को बंद कर घर के अंदर एक कमरे में छिपा हुआ था, जिसे पुलिस ने बड़ी मुश्किल से गिरफ्तार किया था।

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दोषी शख्स को अब कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा
अब अररिया अपर सत्र न्यायाधीश षष्टम सह पॉक्सो कोर्ट ने दस साल की मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप कर हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आरोपी को फांसी की सजा दी गई है। न्यायाधीश शशिकांत राय ने आरोपी 21 वर्षीय अमर कुमार पेश किए गए सबूतों के आधार पर दोषी करार देते हुए, फांसी की सजा दी है। उसे आईपीसी की धारा 376 (डी)(बी), 302, 201 और धारा 4 पॉक्सो एक्ट- 2012 के तहत जमानत से इनकार करते हुए फांसी की सजा सुनाई।

इसके अलावा आईपीएसी की धारा 201 के तहत तीन साल का सश्रम कारावास और तीन हजार रुपये का जुर्माना और नहीं देने पर 10 दिन की अतिरिक्त सजा मुकर्रर की है। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पीड़िता की मां को विक्टिम कंपनसेशन फंड से दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी निर्देश दिया है।



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