हाइलाइट्स

  • रैगांव सीट पर बीजेपी में बगावत के सुर
  • पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ उतरा पूर्व विधायक का परिवार
  • जुगल किशोर बागरी के बेटे और बहू ने भरा नमांकन
  • प्रतिमा बागरी के समर्थन में उतरे मुख्यमंत्री शिवराज

सतना
Revolt in BJP at Raigaon : मध्य प्रदेश में सतना जिले की रैगांव सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन से पहले ही बीजेपी में विद्रोह शुरू हो गया है। पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के परिवार ने ही पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। परिवार के किसी सदस्य को टिकट नहीं दिए जाने से खफा पूर्व विधायक के बेटे और बहू ने निर्दलीय नामांकन कर दिया है। अपनों के विद्रोह से टेंशन में आई पार्टी के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने खुद मोर्चा संभाला है। शुक्रवार को पार्टी प्रत्याशी प्रतिमा बागरी के नॉमिनेशन के बाद जनसभा में कहा कि बीजेपी का हरेक कार्यकर्ता इस चुनाव में प्रत्याशी है।

शिवराज ने कहा कि प्रतिमा अकेली ही उम्मीदवार नहीं हैं। पार्टी के हर कार्यकर्ता को खुद को उम्मीदवार मानकर मेहनत करनी होगी। इस सीट से जुगल किशोर बागरी के बेटे पुष्पराज बागरी टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने जिला महामंत्री प्रतिमा बागरी को उम्मीदवार बना दिया। इससे पहले तक पुष्पराज के भाई देवराज अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। उम्मीदवार की घोषणा होते ही दोनों भाई एक हो गए।

पुष्पराज ने खुद और देवराज ने अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया। शुक्रवार को दोनों ने नामांकन भी कर दिया। पुष्पराज एक दिन पहले ही अपने समर्थकों के साथ जाकर नॉमिनेशन फॉर्म लेकर आए थे। इस मामले में उनके साथ 20 समर्थकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज किया गया है।

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जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने एक सर्वे कराया था जिसमें बागरी परिवार के किसी सदस्य को टिरट नहीं देने की बात सामने आई थी। पार्टी ने तभी परिवार से बाहर प्रत्याशी की तलाश शुरू कर दी थी, लेकिन फैसले को अंतिम समय तक रोककर रखा गया। पार्टी को डर था कि बागरी परिवार पर कांग्रेस डोरे डाल सकती है। इसलिए अंतिम समय में प्रत्याशी का नाम घोषित किया गया।

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देर से घोषणा कर बीजेपी ने कांग्रेस को इसका मौका तो नहीं दिया, लेकिन बागरी परिवार के बगावती तेवर उसके लिए मुश्किल का सबब बन रहे हैं। कुछ महीने पहले दमोह उपचुनाव में पार्टी के पुराने नेता जयंत मलैया के बगावती तेवरों के चलते बीजेपी प्रत्याशी की हार हो गई थी। हालात को भांपते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद मैदान में उतर आए हैं। अब देखना है कि उनकी कोशिशें क्या रंग लाती हैं।



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