हाइलाइट्स

  • बिहार में बिजली संकट पर भी सियासत
  • लालू की पार्टी बनवा रही 6 टन की लालटेन
  • लालटेन ही है आरजेडी का पार्टी सिम्बल
  • जानिए, कहां टांगी जाएगी 6 टन की लालटेन?

पटना
सियासत का दूसरा नाम ही बिहार है। एक तरफ पूरे देश में बिजली संकट एक मुद्दा बना हुआ है तो दूसरी तरफ बिहार में इस पर भी सियासत चालू है। लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी का चुनाव चिन्ह है लालटेन, लिहाजा इसे ही भुनाने और विरोधियों को जवाब देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

लालू की 6 टन वाली लालटेन
बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पटना (Patna) प्रदेश कार्यालय में जल्द ही 6 टन की वजनी लालटेन लगने वाली है। ये लालटेन सिर्फ दिखावे की नहीं होगी बल्कि इससे लगातार रौशनी आती रहेगी। वीरचंद पटेल पथ पर आरजेडी ऑफिस के मेन गेट से अंदर घुसते ही 6 टन की लालटेन आपको नजर आ सकती है। ये अलग बात है कि इस बारे में पार्टी नेता खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन अंदर का माहौल देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि तैयारी कितनी तेजी से चल रही है।
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सियासत के साथ विरोधियों को भी जवाब
बिजली-बत्ती के दौर में आरजेडी के चुनाव चिन्ह पर जब न तब विरोधी बीजेपी या जेडीयू के नेता ताना मार देते हैं। ये बात आरजेडी को हमेशा कचोट देती है। ऐसे में बिजली संकट की खबरों के बीच लालू की पार्टी ये मौका हाथ से क्यों जाने देती। ऊपर से इसी लालटेन के सहारे राष्ट्रीय जनता दल एक बड़ा संदेश देने की तैयारी में भी है। बिहार की राजधानी पटना में आरजेडी मुख्यालय को इन दिनों नया रंग रूप दिया जा रहा है और यहीं पर 6 टन की लालटेन लगाई जाएगी।

ऐसी होगी RJD की 6 टन वाली लालटेन
आरजेडी कार्यालय में जिस बड़ी लालटेन का निर्माण कराया जा रहा है वो पत्थर की बनी होगी। लालटेन की रौशनी कभी बुझ ना पाए, इसके लिए गैस या दूसरे जुगाड़ के जरिए इसे हमेशा जलाए रखने की तैयारी है। जगदानंद सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से आरजेडी दफ्तर पहले से ज्यादाल हाईटेक हुआ है। पार्टी ऑफिस सीसीटीवी कैमरे से लैस तक कर दिया गया है।

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RJD का इतिहास भी जान लीजिए
आरजेडी के गठन का किस्सा भी अपने आप में दिलचस्प है। जब तत्कालीन जनता दल के अंदर लालू पर चारा घोटाले को लेकर राज्य में मुख्यमंत्री पद छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था तभी लालू ने 5 जुलाई 1997 को दिल्ली में जनता दल को छोड़ राष्ट्रीय जनता दल बना लिया। स्थापना के वक्त लालू प्रसाद यादव, रघुवंश प्रसाद सिंह, कांति सिंह समेत 17 लोकसभा सांसद और 8 राज्यसभा सांसदों की मौजूदगी में बड़ी तादाद में कार्यकर्ता और समर्थक जुटे थे।

इसके बाद 2005 में राजद के बुरे दिन शुरू हो गए। सत्ता से बेदखली के बाद वो राज्य में इतने कम सीटों वाली पार्टी बनी जिसकी खुद लालू को उम्मीद नहीं थी। लेकिन साल 2020 के विधानसभा चुनाव में लालू की पार्टी ने 75 सीटें जीत बिहार की सबसे बड़ी पार्टी का खिताब अपने नाम कर लिया।



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