ग्रामीणों क्षेत्रों में खुले में शौच एक बड़ी समस्या है। कई जगहों पर घरों में शौचालय होने के बावजूद महिलाएं बाहर जाती हैं। इस दौरान अनहोनी का डर भी रहता है। भोपाल से सटे एक गांव में खुले में शौच न जाएं, इसके लिए एक अनोखा काम किया गया है। लोगों को जागरूक करने के लिए बुजुर्ग महिलाएं लोटा लेकर दौड़ लगाई हैं। वहीं, बहुएं और बेटियां मैदान में बैठकर ताली बजा रही थीं। इस रेस में तीन महिलाएं विजेता बनी हैं।

लोटा दौड़ का आयोजन

लोटा में पानी लेकर शौच जाना शर्म की बात होती है। इसके बावजूद लोग जाते हैं। इस सोच को बदलने के लिए भोपाल के फंदा गांव में प्रशासन की तरफ से लोटा दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में सिर्फ बुजुर्ग महिलाएं ही शामिल हुईं। कुल 20 सालों ने इसमें हिस्सा लिया है। बहुओं के लिए लोटे में पानी भरकर सभी रेस लगाई हैं। इसे लेकर गांव में एक उत्सवी माहौल था।

जागरूकता के लिए किया गया था आयोजन

इस आयोजन के पीछे का मकसद गांव के लोगों में जागरूकता पैदा करना था। लोटा दौड़ के जरिए प्रशासन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि खुले में शौच नहीं जाएं। शौच के लिए इज्जत घर में ही जाएं। सासों ने बहुओं को संदेश दिया है कि हमने अब खुले में शौच जाना छोड़ दिया है।

बहुओं से लिया वादा

बहुओं के लिए सास की लोटा दौड़ आयोजित की गई थी। इस दौरान सास ने अपनी बहुओं से वादा लिया है कि वह जिंदगी भर खुले में शौच नहीं जाएंगी। एक सास ने कहा कि खुले में टॉयलेट जाना हमने छोड़ दिया है। बहुओं को सीख देने के लिए लोटे में पानी भरकर रेस लगाई है। इस रेस से बहुओं को सबक मिला है। फंदा गांव भोपाल शहर से 25 किलोमीटर दूर है।

खुले में शौच जाने में महसूस होती थी शर्मिंदगी

दौड़ने वाली महिलाओं की उम्र 50-60 साल थीं। वहीं, दर्शक दीर्घा में बहुएं और बेटियां बैठी थीं। दौड़ पूरी होने के बाद सास ने विनिंग प्वाइंट पर पानी से भरा लोटा फेंका है। साथ ही संदेश दिया कि बहुएं जिंदगी भर खुले में शौच न जाएं। फंदा गांव की पुनिया बाई ने कहा कि खुले में शौच करने से शर्मिंदगी होती है। इसलिए मैंने खुले में शौच के लिए जाना छोड़ दिया है। बहुओं से भी यह बात कहती हूं। अब रेस में उतरकर उन्हें नसीहत दूंगी। इसके जरिए सास-बहू में झिझक दूर होगी।

ये बनीं विजेता

वहीं, लौटा दौड़ में तीन महिलाओं को विजेता घोषित किया गया है। जीत की खुशी में बहुओं ने अपनी सास को फूलों की माला पहनाया है। फर्स्ट राधा प्रजापत, सेकंड मंजू प्रजापति और थर्ड अर्पिता प्रजापति रही हैं। इन्हें मेडल भी दिया गया है। भोपाल में पहली बार ऐसा किया गया है।



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