– 01 नंबर-बुवाई-940.55 हैक्टेयर
-02 नंबर- उत्पादन-586.278 टन
– देश का दूसरा अनुसंधान केन्द्र होगा बाड़मेर में

रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.
बारिश के पानी से ही निपजने वाला बाड़मेर का बाजरा अब रेगिस्तान में कृषि कुएं और नहरी पानी की आवक के बाद बुवाई में प्रदेश में पहले और उत्पादन में दूसरे स्थान पर आ गया है और इंदिरा गांधी और नमज़्दा नहर का पानी नसीब होते ही करीब 10 लाख टन के साथ प्रदेश में अव्वल पहुंच होगा। सोने पर सुहागा देश का दूसरा बाजरा अनुसंधान केन्द्र बाड़मेर में स्वीकृत होनेे से इसकी बेहतरीन किस्में स्वाद, गुणवत्तता और मात्रा तीनों को ऊंचाई पर ले जाएगी। पीला बाड़मेरी बाजरा का स्वाद अब ऐसा चढऩे वाला है कि गुजराती बाजरी का रेगिस्तान से सूपड़ा साफ हो जाएगा।
गुजरात को यों पछाड़ेगा बाड़मेर
करीब तीन दशक से बाड़मेर में बारिश आधारित ही बाजरा होने से गुजराती बाजरी का बाजार बढ़ रहा था। अब सिंचित क्षेत्र व नर्मदा नहर ने बाड़मेर में बाजरे की बुवाई व उत्पादन को बढ़ा दिया है,जिससे बाड़मेरी बाजारा भी अब गुजरात जाने लगा है।
देश में राजस्थान और राजस्थान मे बाड़मेर
देश का सवाज़्धिक बाजरा उत्पादन राजस्थान में करीब 45.22 प्रतिशत हो रहा है जो करीब 46 टन है, इसमें बाड़मेर 6 लाख टन के करीब का उत्पादन दे रहा है। बाजरे के बुवाई के साथ अब बाड़मेर की बाजरी के उपज को बढ़ाने पर कायज़् होने लगा है जो महत्वपूणज़् है।
70 दिन में पकेगी अब हमारी बाजरी
रेगिस्तानी इलाके में बाजरी को पकने में 120 दिन लगते थे, यह पूणज़्तया बारिश आधारित थी। अब बाजरे की नई किस्म एमपी एम एस-17 और एम पी एम-एस-21 की बुवाई की जाने लगी है जो 70 से 80 दिन में पक जाएगी। यह किसानों के लिए गुजरात को टक्कर देने का बड़ा आधार बनेगी।
फसल बीमा का संकट दूर होगा
बाड़मेर क्षेत्रफल और उत्पादन में तो आगे है लेकिन उपज में प्रदेश में 28 वें स्थान पर है। यानि बाजरा बोया प्रदेश में सवाज़्धिक(940.55 हैक्टेयर) बाड़मेर में है। उत्पादन 586.278 टन, प्रदेश में द्वितीय बाड़मेर है लेकिन उपज प्रति हैक्टेयर 623 क्विंटल ही है, जो प्रदेश में 28 वें स्थाप पर है। कम पानी, रेगिस्तानी बालू जमीन और ज्यादा समय की वजह से यह है।
बाजरा अनुसंधान केन्द्र
देश का दूसरा बाजरा अनुसंधान केन्द्र बाड़मेर के गुड़ामालानी में प्रस्तावित हुआ है।
अनुसंधान केन्द्र से फायदे-
– अधिक उत्पादन वाले क्षेत्र विशेष की नई किस्मों की खोज
– जमज़् प्लाजा देसी बाजरा पर अनुसंधान कायज़्
– रोग प्रतिरोधक किस्मों का विकास
– प्रमाणिक बीज किसानों को आसानी से उपलब्ध होंगे
– बाजरे में पाए जाने वाले पौष्टिक तत्वों पर होगा अनुसंधान
– बाजरा का आटा जल्दी खराब क्यों होता है,इस पर होगा शोध
-बाजरा के मूल्स संवद्धज़्न व प्रस्संकरण पर विशेष ध्यान
– बाजरा के बीज व्यापार को बढ़ावा, कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन
– किसानों की आय में वृद्धि
वर्ष- 2019-20
राज्य बाड़मेर
क्षेत्रफल-4249.67 940.555(हैैक्टेयर)
बाजरा स्वास्थ्यवद्र्ध
बाजरे के 100 ग्राम खाद्य हिस्से में लगभग 11.6 ग्राम प्रोटीन, 67.5 ग्राम काबोहज़इडेट, 8 मि.ग्रा लौह तत्व और 132माइक्रोग्राम कैरोटीन मौजूद होता है, जो हमारी आंखों की सुरक्षा करता है। बाजरे में ऊर्जा 361 एवं कैल्सियम 42फीसदी रहता है।











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