धौलपुर. ई-ग्रास चालान के जरिए राज्य सरकार को राजस्व की चपत लगाने वाले गिरोह की मार रजिस्ट्री कराने वाले लोगों पर पड़ रही है। पहले तो लोगों ने रजिस्ट्री के पैसे दिए। फर्जी चालान गिरोह ने पैसे जेब में रख सरकार और लोगों को चपत लगाई। अब मामला खुलने पर विभाग ने रजिस्ट्री कराने वाले करीब २८ लोगों को वसूली के नोटिस जारी किए हैं।

By: Naresh

Published: 13 Oct 2021, 11:09 AM IST

जो ठगी का हुए शिकार, उन्हीं से वसूली कर रही सरकार

– फर्जी ई-ग्रास चालान से रजिस्टी का मामला: थमाए नोटिस
– हरकत में आया विभाग, जांच जारी

धौलपुर. ई-ग्रास चालान के जरिए राज्य सरकार को राजस्व की चपत लगाने वाले गिरोह की मार रजिस्ट्री कराने वाले लोगों पर पड़ रही है। पहले तो लोगों ने रजिस्ट्री के पैसे दिए। फर्जी चालान गिरोह ने पैसे जेब में रख सरकार और लोगों को चपत लगाई। अब मामला खुलने पर विभाग ने रजिस्ट्री कराने वाले करीब २८ लोगों को वसूली के नोटिस जारी किए हैं। इसमें 12 प्रतिशत की ब्याज सहित पैसा जमा कराने को कहा गया है। ऐसे में लोग खुद को दोहरा ठगा महसूस कर रहे हैं। बता दें, इस गिरोह ने राज्यभर में ई-ग्रास चालान के जरिए अलग-अलग विभागों में साठगांठ करके राज्य सरकार को स्टाम्प खरीदने, रजिस्ट्रियां कराने समेत कई मामलों में करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया है। धौलपुर में भी 39 लाख के फर्जी ई-ग्रास चालान का मामला सामने आया है।

कर सकते हैं फर्जीवाड़ा

जानकारों के अनुसार कोई व्यक्ति फर्जीवाड़ा करना चाहे तो एक चालान का शुल्क देकर उससे सौ या हजार गुणा के चालान के रूप में उपयोग कर सकता है। बता दें कि ई-स्टाम्प पेपर का उपयोग सिर्फ जमीन-मकान का निबंधन कराने के लिए ही नहीं होता है। इससे शपथ-पत्र (एफिडेविट), करारनामा (एग्रीमेंट), विल (वसीयतनामा) समेत कई दस्तावेजी कार्य किए जा सकते हैं। हालांकि इसका सीरियल नंबर एक रहेगा, लेकिन इसे बहुत ध्यान देने पर जमीन-मकान की रजिस्ट्री में ही पकड़ा जा सकता है। बाकी के काम में यह फर्जीवाड़ा पकडऩे का कोई सिस्टम नहीं है।

बनती है ऑटो पीडीएफ फाइल

स्टाम्प वेंडर बताते हैं कि ई-ग्रास लॉगइन करके पेमेंट करते ही चालान की ऑटो-पीडीएफ फाइल बन जाती है, जो गलत है। इससे एक बार शुल्क देकर पीडीएफ की कई ओरिजिनल कॉपी निकाली जा सकती हैं। यदि पीडीएफ नहीं बनती, तो एक व्यक्ति एक बार में एक ही प्रिंट निकाल पाता। इससे जितनी कॉपी चाहिए, उसके लिए उतनी बार शुल्क देना पड़ता। ईमानदार व्यक्ति के लिए यह सिस्टम तो ठीक है, लेकिन फर्जीवाड़ा करने वालों को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई।

हो रहे परेशान

विभाग की ओर से नोटिस थमाए गए राघवेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, नीरज कुमार आदि ने पत्रिका को बताया कि एक बार तो रजिस्ट्री के दौरान उनका पैसा चला गया। अब वसूली का नोटिस मिलने से दोहरी मार पड़ रही है। ऊपर से 12 फीसदी ब्याज भी देना पड़ेगा। विभाग को चाहिए कि फर्जीवाड़े की जड़ में जाकर गिरोह का राजफाश करना चाहिए।













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